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सेबी अब कर सकेगा तलाशी और गिरफ्तारी

Fri, 29 Aug 2014 08:53 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 29 Aug 2014 08:53 AM IST
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Sebi's New powers to fast-track prosecution, refunds, attachment and arrest

पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) अब पोंजी स्कीम चलाने वाले व्यक्ति, संस्था या समूहों के खिलाफ तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दे सकेगा। सरकार ने सेबी को गैर कानूनी तरीके से जमा योजनाओं पर लगाम लगाने के अधिकार देने वाले नए कानूनों को अधिसूचित कर दिया। नए कानून के तहत सेबी को कॉल डाटा रिकॉर्ड एक्सेस करने जैसे महत्वपूर्ण अधिकार भी मिल गए।

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सेबी के प्रमुख यूके सिन्हा ने कहा कि नियामक को मिले नए अधिकारों से वह डिफॉल्टरों और गैर कानूनी तरीके से जमा लेने वाली योजनाओं के खिलाफ अभियोजन में तेजी ला सकेगा। पुख्ता प्रमाणों के साथ फास्ट ट्रैक पर तलाशी और जब्ती की अनुमति नियामक सीधे स्पेशल सेबी कोर्ट से लेने में सक्षम हो जाएगा। स्पेशल सेबी कोर्ट बनाए जाने से जालसाजों की धरपकड़ तुरंत की जा सकेगी और नियामक उनसे रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा।
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उन्होंने कहा कि अपराधी नियामक के आदेश की अब और अवहेलना नहीं कर सकेंगे, न ही मामलों को लंबे समय तक खींच सकेंगे। नए कानून से उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी और निवेशकों की रकम वापसी सुनिश्चित हो सकेगी। सिन्हा ने कहा कि रिकवरी और रिफंड का अधिकार मिल जाने का फायदा निवेशकों को मिलेगा। इसके जरिए सेबी निवेशकों को गैरकानूनी निवेश योजनाओं में फंसी उनकी रकम वापस दिलाने में मदद कर सकेगा।
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प्रतिभूति कानून संशोधन अधिनियम को संसद ने इस महीने पारित कर दिया था। नए अधिनियम में पूंजी बाजार को नियंत्रित करने वाले सभी कानूनों में संशोधन किया गया। इसमें मामलों की फास्ट ट्रैक पर जांच और सुनवाई के लिए स्पेशल सेबी कोर्ट गठित करने की भी सुविधा उपलब्ध होगी। धोखाधड़ी के संदेहास्पद मामलों में सेबी अब तलाशी और जब्ती संबंधी कार्रवाई भी कर सकेगा।

सिन्हा ने कहा कि कई मामले 10-15 साल से चल रहे हैं और उनमें कोई रिकवरी नहीं की जा सकी है। व्यक्ति या कंपनी के लिए ‘नेमिंग एंड शेमिंग’ की मामूली कार्रवाई के अलावा नियामक के पास कोई प्रभावी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं था। नए कानून से इसमें बदलाव आएगा।


नए कानून के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक की सभी अनियमित जमा योजनाओं के खिलाफ सेबी कार्रवाई कर सकेगा। सिन्हा ने कहा कि नए कानून कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और इसलिए यह सेबी के न्यायाधिकार क्षेत्र में लाया गया है। इससे अब ऐसी योजनाएं चलाने वालों के लिए नियमों की अनदेखी करना बहुत मुश्किल हो गया है।

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