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अब कलर कोड से जानें म्यूचुअल फंड में कितना रिस्क
मुंबई/एजेंसी
Updated Tue, 19 Mar 2013 11:56 PM IST
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बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) आम निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड के जरिए इक्विटी बाजार में निवेश की राह और आसान करते हुए फंड चलाने वाली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल कर निवेशकों को यह बताए कि उसके फंड में निवेश करने में उन्हें कितना जोखिम उठाना पडे़गा।
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सेबी ने जोखिम के स्तर को अभिव्यक्त करने लिए बाकायदा एक कलर कोड भी जारी किया है। इसके तहत कम जोखिम वाले फंडों के लिए नीला रंग, मध्यम जोखिम के लिए पीला और अधिक जोखिम वाले फंडों के लिए भूरा रंग इस्तेमाल किया जाएगा। इस कलर कोड को लागू करने के लिए सेबी ने 1 जुलाई 2013 की तारीख निर्धारित की है।
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सेबी के निर्देश के मुताबिक म्यूचुअल फंड हाउसों को ऑफर के आवेदन पत्र के पहले पन्ने पर इन रंगों का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा कॉमन अप्लीकेशन फार्म और विज्ञापनों में भी फंड हाउसों को इन रंगों का इस्तेमाल करना होगा। सेबी ने नए म्यूचुअल फंडों के साथ-साथ बाजार में पहले से मौजूद म्यूचुअल फंडों पर भी यह कलर कोड लागू करने को कहा है।
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सेबी ने इस बारे में जारी अपने आदेश में कहा है कि ग्राहकों को भ्रामक सूचनाएं देकर म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट बेचे जाने की शिकायतों को देखते हुए प्रोडक्ट लेविलिंग प्रणाली तैयार करने के लिए एक कमेटी गठित की गई थी, ताकि ग्राहक आसानी से यह समझ सकें कि जिस स्कीम में वह पैसा लगा रहे हैं, वह अनुकूल है या नहीं।
इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया गया है कि सभी म्यूचुअल फंडों को निर्धारित मानदंडों पर आधारित लेबिलिंग प्रणाली को अपनाना होगा।