'इस मामले में कई विकसित देशों से आगे है सेबी'

नई दिल्ली/ शिशिर चौरसिया Updated Mon, 01 Dec 2014 10:58 AM IST
SEBI far ahead in Regulation from many developed countries : UK Sinha
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का कहना है कि शेयर बाजार पर निवेशकों का भरोसा एक बार फिर से लौटने लगा है और यह निवेशकों की सक्रियता का ही परिणाम है कि बाजार में फिर से रौनक लौटी है। जहां तक छोटे निवेशकों का सवाल है तो वे अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वे अभी भी बाजार से बाहर हैं। उनकी वापसी हो रही है, लेकिन सीधे-सीधे ट्रेडिंग में नहीं बल्कि म्यूचुअल फंड के जरिए। अब उन डीमैट अकाउंट में भी कारोबार होने लगा है जो कि वर्ष 2008-09 के बाद से इन-एक्टिव थे। जहां तक रेगुलेशन की बात है तो सेबी इस क्षेत्र में कई विकसित देशों से भी आगे है। अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने सेबी के अध्यक्ष यूके सिन्हा से पिछले दिनों निवेशकों से जुड़े मसलों पर विस्तृत बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-
 
शेयर बाजारों में रौनक लौटने के बाद भी अभी तक छोटे निवेशक बाजार से नदारद हैं?
ऐसी बात नहीं है कि छोटे निवेशक बाजार में नहीं लौटे हैं। हालांकि, आप यदि वर्ष 2008 से पहले के दिनों की याद करें, तो उस तरह से निवेशक अभी तक बाजार में नहीं लौटे हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से छोटे निवेशक फिर से बाजार में लौटने लगे हैं, पर सीधे-सीधे सेकेंडरी मार्र्केट में नहीं। ऐसे निवेशक म्यूचुअल फंड के रूट से बाजार में आ रहे हैं। हमारी जानकारी में यह तथ्य आया है कि 2008-09 के बाद जो डीमैट अकाउंट इनऐक्टिव हो गए थे, उनमें फिर से एक्टिविटी शुरू हो गई है। अभी म्यूचुअल फंड से शुरुआत हुई है, थोड़ा और विश्वास जमेगा तो वे सीधे सेकेंडरी मार्केट में आ जाएंगे।
 
निवेशकों का विश्वास जमाने के लिए सेबी क्या कर रहा है?
सेबी का प्रयास है कि शेयर बाजारों में एक ट्रस्टवर्दी वातावरण तैयार हो। हमारा बाजार बढ़िया तरीके से रेगुलेटेड है। कहीं कोई कठिनाई नहीं है। कहीं कोई गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो कड़ी कार्रवाई होती है। निवेशकों को तो यही चाहिए कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो।

कई बार भेदिया कारोबार की शिकायतें मिलती हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
भेदिया कारोबार पर हमने अंकुश लगाया है। यही नहीं, शेयर बाजार से असूचीबद्ध (डीलिस्टिंग) होने की प्रक्रिया में जो गड़बड़ियां थीं, वह हमने दूर की हैं। विश्व बैंक हर साल ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर एक रिपोर्ट निकालता है। वर्ष 2012 के दौरान इसमें भारत की रैंकिंग 49 थी जो कि 2013 में सुधर कर 34 तक आ गई। इस रिपोर्ट में 2014 के दौरान तो भारत की रैंकिंग सुधर कर 7 पर आ गई है। इसी से पता चलता है कि हम इस दिशा में कितने प्रयासरत हैं कि हमारी रैंकिंग कई विकसित देशों से भी आगे है। हमने जो प्रावधान किए हैं, उससे यहां की कंपनियों के निदेशक मंडल में विविधता आई है। हमने निदेशक मंडल में कम से कम एक महिला का रहना अनिवार्य किया है। ऐसा प्रावधान बड़े देशों में भी नहीं है।

तो कह सकते हैं कि इस दिशा में हम औरों से आगे हैं?
देखिए, यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह हमारा कोई आखिरी प्रयास नहीं है। यह प्रयत्न लगातार चलता रहेगा। हमें जैसे-जैसे सूचना मिलेगी, उसी हिसाब से काम करते रहेंगे।

सेबी प्राथमिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का लिस्टिंग टाइम कम करने पर विचार कर रहा था, क्या हुआ इस दिशा में?
हमारे निदेशक मंडल की बीते 19 नवंबर को बैठक हुई थी जिसमें इलेक्ट्रानिक आईपीओ के बारे में एक प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया है। हम चाहते हैं कि वर्तमान टी प्लस 12 को घटाकर टी प्लस 5 या 6 कर दिया जाए। इससे बोली के अंतिम दिन के बाद पांच या छह दिन में उस कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग हो जाएगी और शेयरों में कारोबार होने लगेगा।

छोटे निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए ओएफसी में रिटेल इन्वेस्टर को कोई मौका मिलेगा?
ऑफर फॉर सेल (ओएफसी) के तहत प्राथमिक बाजार का ट्रांजेक्शन नहीं होता है। यह सेकेंडरी मार्केट का कारोबार है। वहां रिटेल इन्वेस्टर को कुछ छूट या आरक्षण देना संभव नहीं है।

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