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सहारा की संपत्तियां जब्त करने के लिए सेबी स्वतंत्र: कोर्ट
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
Updated Wed, 06 Feb 2013 10:36 PM IST
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निवेशकों का पैसा नहीं लौटने के मामले में सहारा समूह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आदेश के बावजूद निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये नहीं लौटाने के मामले में सेबी उसकी दो कंपनियों के खाते और संपत्ति जब्त करने के लिए स्वतंत्र है। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही सहारा समूह के खिलाफ अदालत के आदेश पर अमल नहीं करने के संबंध में अवमानना की कार्यवाही का नोटिस भी जारी किया और समूह को नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
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कोर्ट ने सेबी को लिया आड़े हाथ
जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने 31 अगस्त 2012 के आदेश के अनुरूप सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं करने के कारण सेबी को भी आड़े हाथ लिया। इस आदेश के तहत न्यायालय ने सेबी को इन कंपनियों के खाते सील करने और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।
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अदालत ने सेबी से जानना चाहा कि उसने सहारा समूह के खिलाफ फैसले पर अमल की दिशा में क्या किया है। न्यायाधीशों ने पूछा, ‘आप क्या कदम उठा रहे हैं? आप कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। फैसले में आपसे कहा गया था कि आपको क्या करना है लेकिन आप वह नहीं कर रहे हैं।’
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तर्क से कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सका सेबी
इस पर सेबी ने कहा कि वह कार्रवाई कर रहा है और उसने कंपनी को नोटिस जारी करने के साथ ही बैंक खाते सील करने के लिए मुंबई की सिविल कोर्ट से भी संपर्क किया है। न्यायाधीश सेबी के इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कहा कि नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। सेबी को पिछले साल के आदेश का पालन करना होगा। न्यायाधीशों ने कहा, ‘आपने नोटिस क्यों दिया और कार्रवाई क्यों नहीं की। आपको हमारे आदेश पर अमल करना है।’
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कंपनियों के खिलाफ उसके समक्ष लंबित अवमानना की कार्यवाही इस समूह के खिलाफ सेबी की कार्रवाई में बाधक नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने गत वर्ष 31 अगस्त को सहारा समूह की इन दो कंपनियों को निवेशकों का 15 फीसदी ब्याज समेत करीब 24 हजार करोड़ रुपये तीन महीने के भीतर लौटाने का निर्देश दिया था।
सहारा का नहीं है कोई बकायाः राम जेठमलानी
दूसरी ओर, सहारा समूह ने धनराशि नहीं लौटाने को न्यायोचित ठहराते हुए कहा कि न्यायालय का फैसला आने से पहले ही निवेशकों का अधिकांश धन लौटाया जा चुका है। इन कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने कहा कि कुछ भी बकाया नहीं है और दस हजार करोड़ रुपये जमा कराना मुश्किल है। न्यायालय सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ सेबी की अवमानना कार्यवाही के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।