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नई खाद्य प्रसंस्करण नीति में अधिक सब्सिडी पर पेंच
लखनऊ/रमण शुक्ला/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Dec 2012 10:23 PM IST
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नई खाद्य प्रसंस्करण नीति में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा निवेशकों को नया उद्योग लगाने पर उद्योग नीति से ज्यादा सब्सिडी दिए जाने पर वित्त विभाग ने आपत्ति जताई है। वर्तमान में प्रदेश सरकार के उद्योग नीति के तहत किसी भी तरह के उद्योग लगाने पर सरकार की ओर से 5 फीसदी नकद सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है, जबकि खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने 8 फीसदी सब्सिडी देने का शासनादेश जारी कर दिया है।
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ऐसे में वित्त विभाग की आपत्ति पर मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से फाइल तलब की है। वित्त विभाग की आपत्ति है कि एक विभाग द्वारा उद्यमियों को ज्यादा सब्सिडी दिए जाने से प्रदेश में सामूहिक रूप से औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई उद्योग नीति की अनदेखी होगी। विभागों के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ जाएगी। सरकारी खाजाने पर अनावश्यक बोझ बढ़ेगा। यही नहीं वर्तमान में सरकार के करीब दो दर्जन विभाग ऐसे हैं जो अलग-अलग क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को सब्सिडी का भुगतान कर रहे हैं।
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इधर, नई खाद्य प्रसंस्करण नीति में उद्यमियों को विशेष रियायत देने के पीछे उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग का तर्क है कि फूड प्रोसेसिंग जोन को बढ़ावा देने के लिए विशेष रियायत की व्यवस्था की गई है। विभाग का कहना है कि कच्चे माल के रूप में मटर, हल्दी, अदरक आदि फ सलों की बहुतायत वाले जिलों में फसल विशेष की प्रसंस्करण इकाइयां विकसित की जाएंगी।
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यह रियायतें दी गई है
नीति अवधि में प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ-साथ ताजा फल-सब्जियों की खुदरा बिक्री के लिए रिटेल चेन स्थापित करने पर अधिकतम 15 लाख रुपये का ब्याज मुक्त लोन की सुविधा मुहैया कराए जाने। नवीन खाद्य प्रसंस्करण यूनिट को विद्युत कर में दस साल की छूट की सुविधा दिलाई जाएगी। क्षेत्रीय विशिष्टताओं क आधार पर प्रसंस्कृत उत्पादों की ब्राडिंग को प्रोत्साहित करने के लिए खर्च का पचास प्रतिशत अनुदान सुलभ कराया जाएगा, ताकि छोटे एवं मझौले उद्यमियों को बाजार उपलब्ध हो। दस करोड़ या इससे अधिक की लागत वाली यूनिट के अलावा सूक्ष्म एवं लघु इकाईयों को भी लोन के ब्याज पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
ये विभाग दे रहे हैं सब्सिडी
वर्तमान में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, लघु उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा वस्त्र उद्योग, सार्वजनिक उद्यम, कृषि, संस्थागत वित्त एवं कर निबंधन, वित्त, राजस्व, वाणिज्कर, ऊर्जा, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, पर्यावरण, भूतत्व एवं खनि कर्म, आबकारी, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, दुग्ध विकास और पर्यटन आदि विभाग शामिल है।