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हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के और विनिवेश पर रोक

Tue, 19 Jan 2016 07:45 PM IST
Updated Tue, 19 Jan 2016 07:45 PM IST
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SC stops further disinvestment in Hindustan Zinc

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी के और विनिवेश पर रोक लगा दी है। हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के प्रबंधन पर नियंत्रण वेदांता की सहायक कंपनी के पास है।

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शीर्ष अदालत ने इस कंपनी के 29 फीसदी कीमती शेयर बेचने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। यह कंपनी सामरिक महत्व के खनिज पदार्थों का कारोबार करती है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार को विनिवेश के मामले में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
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पीठ ने साफ किया कि वह स्टरलाइट वेदांता को निवेश करने से नहीं रोक रही है बल्कि वह सरकार को कंपनी में अपने बाकी बचे शेयर को बेचने से रोक रही है। स्टरलाइट वेदांता ने इस कंपनी का अधिग्रहण किया है।
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क्यों वेदांता को सौंपी बेशकीमती संपत्ति:कोर्ट

SC stops further disinvestment in Hindustan Zinc

पीठ ने कहा कि मामले के निपटारे तक सरकार को इसमें और अधिक विनिवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंगलवार को सुनवाई को दौरान वेदांता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि घाटे में चल रही हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के बड़े हिस्से को 14 वर्ष पूर्व वेदांता ने अपने हाथों में लिया था और अब वह मुनाफे वाली इकाई हो गई।

शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि बेशकीमती संपत्ति वेदांता को सौंपने की आखिरकार जरूरत क्यों पड़ी। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह नीतिगत फैसला है।

आखिरकार सरकार इस कंपनी में अपना शेयर रखकर ही क्या करेगी। जिस पर पीठ ने कहा कि इसके लिए सरकार को कानून में संशोधन करना होगा अन्यथा उसे कंपनी में शेयर रखना ही होगा।

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