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रिटेल में एफडीआई पर रोक लगाने से SC का इनकार

Mon, 15 Oct 2012 09:13 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 15 Oct 2012 09:13 PM IST
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SC refuses to stay decision of FDI in retail
सुप्रीम कोर्ट ने खुदरा व्यापार के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मगर एफडीआई को मंजूरी देने संबंधी अधिसूचना जारी होने से पहले ही विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के नियमों में संशोधन करने को कहा है। कोर्ट के इस रुख से रिटेल में एफडीआई को लेकर सियासी चुनौतियों से घिरी सरकार को राहत मिली है।
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जस्टिस आरएम लोढ़ा व जस्टिस अनिल आर दवे की पीठ ने अधिवक्ता एमएल शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि इस नीति में कुछ दोष है जिसका उपचार किया जा सकता है। पीठ ने इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक से विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के क्रियान्वयन के लिए निर्धारित नियमों में समुचित संशोधन करने को कहा। ताकि सरकार की इस नीति को क्रियान्वयन की छूट दी जा सके।
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शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि एफडीआई को मंजूरी देने की अधिसूचना जारी होने से पहले फेमा के नियमों में संशोधन कर लिया जाना चाहिए था। साथ ही पीठ ने साफ किया कि फेमा की नियमावली में संशोधन करके रिजर्व बैंक इस दोष को अब भी दूर कर सकता है।
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पीठ ने कहा कि यह एक ऐसी अनियमितता है जिसमें सुधार किया जा सकता है और नियमों में बदलाव करते ही यह दोष दूर हो जाएगा। अदालत ने कहा कि इस अनियमितता के कारण खुदरा व्यापार के क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी देने की नीति पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।

वहीं अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा कि वह फेमा नियमों में संशोधन के लिए तुरंत कदम उठाने के बारे में रिजर्व बैंक के गवर्नर से बात करेंगे। पीठ ने अटॉर्नी की दलील के बाद जनहित याचिका पर सुनवाई पांच नवंबर तक के लिए टाल दी। याद रहे कि जनहित याचिका में कहा गया है कि इस नीति को लागू करने के लिए रिजर्व बैंक की अनिवार्य मंजूरी जरूरी है जो इसमें है ही नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच अक्तूबर को इस याचिका पर अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल से इस मसले को स्पष्ट करने को कहा था। पीठ ने कहा था कि इस मामले में रिजर्व बैंक के नियमों से संबंधित कुछ कड़ियों के न होने के मद्देनजर स्पष्टीकरण की जरूरत है।


याचिकाकर्ता का तर्क था कि खुदरा व्यापार क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी देने के मामले में रिजर्व बैंक की स्वीकृति है ही नहीं। जबकि विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के तहत खुदरा व्यापार प्रतिबंधित है। इसके बावजूद 2008 के बाद कोई नया नियम जारी नहीं किया गया।
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