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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को दिया झटका
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 25 Feb 2013 11:41 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सहारा समूह को निवेशकों के 24,029 करोड़ रुपये लौटाने के लिए और समय देने से इंकार कर दिया। अदालत ने सहारा की दो कंपनियों की ओर से इस संबंध में दायर किए गए आवेदनों को अस्वीकार कर दिया है।
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चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ने अदालत के आदेशों का अनुपालन करने में असफल रहने पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि फरवरी के पहले सप्ताह तक पैसा लौटाने के निर्देश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ। पीठ ने कहा कि हमारे आदेश के मुताबिक यदि आप राशि को नहीं लौटाते तो आपके अदालत आने का कोई मतलब नहीं है।
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याद रहे कि 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को आखिरी बार और समय प्रदान किया था। साथ ही 5,120 करोड़ रुपये तत्काल प्रभाव से लौटाने को कहा था। यह पैसा उन निवेशकों को लौटाया जाना था, जिन्होंने सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड में जमा किया था।
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पीठ ने पिछली सुनवाई में सेबी की आपत्ति के बावजूद सहारा समूह को पैसा वापस करने के लिए समय प्रदान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष अगस्त में सहारा समूह की दो कंपनियों को निवेशकों से जुटाई गई 24,029 करोड़ रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश जारी किया था। दोनों कंपनियों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन माह में निवेशकों को धन वापस करने को कहा गया था।
इस आदेश के खिलाफ शीर्षस्थ अदालत में सहारा समूह की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस जेएस खेहर की पीठ ने चैंबर सुनवाई में सहारा समूह की कंपनियां सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि अगस्त में जारी किए गए फैसले पर फिर से विचार करने का कोई आधार नहीं है।
गौरतलब है सर्वोच्च अदालत ने अगस्त में जारी आदेश में कहा था कि यदि सहारा समूह की दोनों कंपनियां निवेशकों का पैसा लौटाने में विफल रहती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। आदेश का अनुपालन नहीं करने पर सेबी को इन कंपनियों की संपत्ति जब्त करने और बैंक खातों को सील करने को कहा गया था।
शीर्षस्थ अदालत ने सेबी को इन कंपनियों के खिलाफ जांच करने और उनके वास्तविक ग्राहक आधार का पता लगाने तथा अन्य संबंधित सूचनाएं जुटाने का भी निर्देश दिया था। साथ ही दोनों कंपनियों के खिलाफ सेबी की जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल को नियुक्त किया था।