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रैनबैक्सी पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज

Tue, 25 Jun 2013 09:04 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 25 Jun 2013 09:04 PM IST
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sc dismisses plea against ranbaxy

मिलावटी दवाओं के उत्पादन और बिक्री के आरोप में रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज लिमिटेड के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया है।

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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता रैनबैक्सी के खिलाफ भारत में घटिया किस्म की दवाइयों की बिक्री का प्रमाण पेश नहीं कर सका है।

जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने वकील मनोहर लाल शर्मा को इस बात की छूट दे दी कि सबूत जुटाने के बाद वह याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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पीठ ने कहा कि अमेरिका की अदालत की ओर से दिए गए फैसले के आधार पर वह कार्रवाई नहीं कर सकती। पीठ ने वकील से कहा कि समूचे आरोप अमेरिका की अदालत के फैसले के आधार पर लगाए गए हैं। यह भारतीय सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
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सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता भारत में घटिया दवाइयों के उत्पादन और उनकी बिक्री का सबूत पेश करे, तो पीठ उस पर सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता को ही इस तरह के तथ्य पेश करने होंगे। अगर इस कंपनी की दवाइयों से देश के नागरिकों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है, तो उसके प्रमाण प्रस्तुत किए जाएं।

इसके अभाव में दवा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि रैनबैक्सी के खिलाफ मिलावटी या घटिया दवा बेचने का सबूत पेश करने में याचिकाकर्ता नाकाम रहा है।

गौरतलब है कि देश की प्रमुख दवा कंपनी पर मिलावटी दवा तैयार करने और बेचने के आरोप में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा 50 करोड़ (500 मिलियन) डॉलर का जुर्माना लगाए जोने की पृष्ठभूमि में जनहित याचिका दायर की गई थी।


याचिका में इस दवा कंपनी के हिमाचल प्रदेश में पौंटा साहिब और मध्य प्रदेश के देवास में स्थित उपक्र मों समेत भारत में स्थित सभी उत्पादन इकाइयों को सील करने का भी अनुरोध किया गया था। याचिका में रैनबैक्सी के वर्तमान और पूर्व निदेशकों पर मुकदमा चलाने का भी अनुरोध किया गया था।

याचिका में कहा गया था कि मिलावटी दवा बनाना और उनकी बिक्री करना संगीन अपराध है। यह हत्या करने जैसा है और यदि कोई व्यक्ति जानबूझ कर ऐसा करता है, तो भारतीय दंड संहिता के तहत उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

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