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आर्थिक सर्वेः सब्सिडी पर कटौती की तलवार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 28 Feb 2013 12:14 AM IST
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कठिन दौर है और भारत पहले भी ऐसे हालात का सामना कर चुका है, अगर सुधारों की गति को तेज किया जाए और गैरजरूरी खर्च पर अंकुश लगाया जाए तो संकट के दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है।
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इसके चलते आगामी वित्त वर्ष 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 6.1 से 6.7 फीसदी के बीच रह सकती है। बशर्ते कि मानसून सामान्य हो, महंगाई काबू में रहे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार हो। यह लब्बोलुआब है वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा बुधवार को संसद में पेश चालू वित्त वर्ष (2012-13) की आर्र्थिक समीक्षा का।
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वित्त मंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुख्य अर्थशास्त्री रहे रघुराम जी. राजन के नेतृत्व में तैयार समीक्षा में साफ-साफ स्वीकार किया गया है कि सरकार के पिछले कुछ फैसलों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय दशक के बुरे दौर से गुजर रही है और चालू साल के लिए पांच फीसदी की विकास दर को इसमें स्वीकार किया गया है। साथ ही रोजगार और निवेश के मोर्चे पर हालत खस्ता है। वहीं उद्योग और सेवा क्षेत्र की हालत भी बेहतर नहीं है।
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समीक्षा में दिए गए संकेतों से साफ है कि बृहस्पतिवार को चिदंबरम द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी वित्त वर्ष (2013-14) के बजट में सरकार कुछ खर्चों पर अंकुश लगा सकती है जिसमें खासतौर से सब्सिडी शुमार होंगी। इसमें कहा गया है कि गैर जरूरी खर्च पर अंकुश जरूरी है और पेट्रोलियम उत्पादों खास तौर से डीजल, एलपीजी की कीमतों को बाजार के हवाले कर देना चाहिए।
समीक्षा में कहा गया है कि हमें अर्थव्यवस्था को उपभोग खर्च की बजाय निवेश खर्च की ओर मोड़ना होगा। इसके चलते विकास दर तेज होगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि सरकार को कर जीडीपी अनुपात को बढ़ाने का काम करना चाहिए। इससे संकेत मिलता है आगामी साल के बजट में वित्त मंत्री सेवा कर और उत्पाद शुल्क के मोर्र्चे पर कुछ बोझ आम आदमी पर डाल सकते हैं।
हालांकि बचत के घटकर 30.8 फीसदी पर आने का सीधा असर निवेश पर पड़ा है। इसलिए आम आदमी को बचत के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे संकेत मिलता है कि वित्त मंत्री कर बचत के लिए निवेश सीमा में बढ़ोतरी कर सकते हैं। चुनावी साल के पहले का बजट होने की आहट समीक्षा में भी मिल रही है क्योंकि इसमें लोक कल्याण योजनाओं पर खर्च जारी रखने की बात कही गई है।
समीक्षा में कहा गया है कि राजकोषीय स्थिति को दुरुस्त करने पर जोर देना होगा और हाल के दिनों में सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं जिसके चलते चालू साल में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.3 फीसदी पर रह सकता है। विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उपाय करने होंगे क्योंकि चालू खाता घाटा भी चिंताजनक स्तर पर है। जिस तरह के वैश्विक हालात हैं उनमें घरेलू मोर्चे पर अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत करना होगा।
एफडीआई बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं लेकिन सरकार को इस मोर्चे पर और कदम उठाने होंगे ताकि विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़े। साथ ही कारोबारी और निवेश बाधाओं को दूर करने के लिए कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर योजना को समीक्षा में बड़ा कदम बताया है। समीक्षा के मुताबिक मार्च में महंगाई दर 6.2 से 6.6 फीसदी के आसपास रहेगी लेकिन इस बात को भी स्वीकार किया गया है कि आपूर्ति बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में कई जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।