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खर्च करने के मामले में शहरों को पीछे छोड़ते ग्रामीण क्षेत्र

Thu, 28 Feb 2013 11:01 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 28 Feb 2013 11:01 AM IST
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rural areas leaving behind cities in terms of spending in india

क्या आप जानते हैं कि खर्च करने के मामले में भारतीय गांवों ने शहरों को पीछे छोड़ दिया है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार 2009-10 और 2011-12 के बीच में ग्रामीण भारत ने 3.75 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए, जो इस दौरान शहरी भारत के 2.99 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा थे।

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ग्रामीण क्षेत्र क्या है?
सरकार की नजर में ग्रामीण क्षेत्र वह है जहां आबादी 5000 से कम हो। जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम हो और जहां के कामकाजी पुरुषों का 25 फीसदी खेती-बाड़ी में लगा हो।
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ग्रामीण क्षेत्र की मौजूदा स्थिति
-आज ग्रामीण भारत के प्रत्येक दो में से एक घर में मोबाइल फोन है। हालांकि बिहार और ओडिशा जैसे गरीब राज्यों में यह आंकड़ा तीन घरों में से एक मोबाइल फोन का है।
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-2011-2012 के आंकड़ों के अनुसार गांवों के करीब 50 फीसदी घरों में टीवी पहुंच चुका है। 2009-10 में यह आंकड़ा 42 फीसदी था।

-2011-12 के आंकड़ों के मुताबिक गांवों के करीब 20 प्रतिशत घरों में दोपहिया वाहन आ गए हैं। 2009-10 में 14 प्रतिशत ग्रामीण घरों में दोपहिया वाहन थे, जो वर्ष 2004-05 की तुलना में दोगुने हैं।

-2011 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार देश में 16.78 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से मात्र 5.15 करोड़ परिवारों के पास ही शौचालय की सुविधा है। 11.29 करोड़ ग्रामीण परिवार खुले में शौच जाते हैं।

 
गांवों के के विद्युतीकरण मामले में कौन सा देश आगे ?

-सात साल पहले 2012 तक देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई थी। पर समय सीमा खत्म होने पर भी यह लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। भारत गांवों के विद्युतीकरण के मामले में चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से काफी पीछे है।

गांवों में बिजली पहुंचाने के मामले में विभिन्न देशों की स्थिति...
- चीन : 99 फीसदी
- ब्राजील : 98 फीसदी
- दक्षिण अफ्रीका : 75 फीसदी
- भारत : 65 फीसदी
 
ग्रामीण क्षेत्र के लिए पिछले बजट की घोषणाएं
 - राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) का बजट ढाई हजार करोड़ से बढ़ाकर 20,822 करोड़ किया गया
- 15,850 करोड़ एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के लिए
- 6000 मॉडर्न स्कूलों की स्थापना की घोषणा
- 1.25 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष व्यावसायिक शिक्षा देने की योजना
- विधवा पेंशन 200 से बढ़ाकर 300 रुपये की
- बीपीएल परिवार में रोजीरोटी कमाने वाले की मृत्यु की स्थित सहायता राशि 10 से बढ़ाकर 20 हजार की गई
- 7,729 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए

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