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रुपए में एक साल का सबसे बड़ा उछाल

Fri, 23 Aug 2013 08:43 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 23 Aug 2013 08:43 PM IST
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rupee bounces back

एशियाई बाजारों में सुधार के चलते शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 135 पैसे की जोरदार बढ़त लेकर 63.20 के स्तर पर बंद हुआ।

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रुपए में यह पिछले करीब एक साल की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त रही। अमेरिकी फेड रिजर्व के राहत पैकेज में कम कटौती की उम्मीद बढ़ने से भी रुपए को मजबूती मिली।

बाजार के जानकारों के अनुसार, रुपया अब सितंबर के महीने तक 62-65 के स्तर पर बना रहेगा।

वहीं, अगर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के आकलन सही रहते हैं और विकास दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बढ़ती है, तो रुपया मार्च 2014 तक 60 के स्तर पर भी पहुंच सकता है।
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एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ के अनुसार शुक्रवार का दिन रुपए के लिए अच्छा होने की प्रमुख वजह एशियाई बाजार रहे हैं। चीन के पीएमआई आंकड़े जहां उम्मीद से बेहतर रहे हैं।
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वहीं हांगकांग, दुबई, सिंगापुर के बाजार में रुपए को लेकर आशंका कम हुई है। इसके अलावा सितंबर में अमेरिकी फेड रिजर्व के राहत पैकेज लेने के संकेत भी बेहतर मिले हैं। ऐसी संभावना है कि फेड रिजर्व प्रति माह 60 अरब डॉलर की जगह 70-75 अरब डॉलर तक ही कटौती करेगा।

इसके चलते से रुपए में मजबूती आई है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रुपया 62-65 के स्तर पर सितंबर तक रहने की संभावना है।

इंडिया फॉरेक्स एडवाइजर्स का कहना है कि इस सप्ताह रुपए में सुधार की उम्मीद है। यदि रुपया 64 के स्तर से नीचे बना रहता है, तो यह 62.80-62.60 के स्तर तक आ सकता है। रुपए में मजबूती की संभावना क्रिसिल ने भी जताई है।

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार रुपया मार्च 2014 तक 60 के स्तर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा कम होने और विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने की संभावना है।


घरेलू मुद्रा बाजार में रुपए में शुक्रवार को मजबूती के साथ 64.30 पर कारोबार शुरू हुआ। सत्र में यह 64.75 के निचले स्तर तक गया। आखिर में रुपया 135 पैसे की जोरदार बढ़त लेकर 63.20 पर बंद हुआ।

सरकार के बयान का नहीं रहा ज्यादा फर्क
बृहस्पतिवार को 65 के स्तर को पार करने पर वित्त मंत्री और आरबीआई गवर्नर दोनों ने कैपिटल कंट्रोल न करने का बयान देकर बाजार और रुपए को संभालने की कोशिश की थी।

इसके बावजूद अर्थशास्त्री रुपए में हुए सुधार की वजहें सरकार की कोशिशों की जगह विदेशी बाजार को बता रहे हैं।

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