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भेदिया कारोबार की बीमारी को उखाड़ फेंके सेबी: पीएम
मुंबई/एजेंसी
Updated Fri, 24 May 2013 08:37 PM IST
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पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से इनसाइडर ट्रेडिंग (भेदिया कारोबार) की बीमारी को घरेलू शेयर बाजार से उखाड़ फेंकने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सेबी को और अधिकार व शक्तियां देकर इसे और मजबूत व सक्षम बनाने का भरोसा दिलाया है।
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साथ ही उन्होंने घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए निवेश को और आसान बनाकर व्यक्तिगत निवेशकों के साथ-साथ केंद्रीय बैंकों, वेल्थ फंडों व पेंशन फंडों की बाजार निवेश में भागीदारी बढ़ाने की जरूरत भी जताई।
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सेबी के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सेबी को और मजबूती प्रदान करने के लिए हर तरह के कदम उठाने को प्रतिबद्ध है, ताकि एक सशक्त बाजार नियामक के रूप में वह बेहतर ढंग से कामकाज कर सके।
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आने वाले समय में सेबी की दक्षता व क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इनसाइडर ट्रेडिंग की बीमारी को किस तरह घरेलू बाजार से उखाड़ फेंकती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता लगा पाना मुश्किल है पर इसको जड़ से खत्म करना बाजार की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समूचे वित्तीय क्षेत्र को इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए कि किस तरह से आम निवेशकों की घरेलू बचत को एक बेहतर निवेश के रूप में पूंजी बाजार में लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि बाजार का संचालन जब अच्छी तरह से किया जाता है, तब ही बचत और निवेश की दर में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसलिए पूंजी बाजार का कुशलता पूर्वक संचालन किया जाना बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि बीते दशक में देश की आर्थिक विकास दर ऊंचे स्तर पर रहने का एक बड़ा कारण देश में बचत और निवेश की दर बेहतर रहना था।
उन्होंने कहा कि सरकार ने खुदरा निवेशकों को पूंजी बाजार से जोड़ने के लिए राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) लांच करने जैसे कई कारगर कदम उठाए हैं और इस दिशा में उसकी ओर से आगे भी प्रयास किए जाते रहेंगे।
निवेशक आज पहले की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि आज उनके पास पर्याप्त मात्रा में बाजार संबंधी जानकारियों व सूचनाओं को हासिल करने के साधन मौजूद हैं।
निर्भीक बने सेबी: वित्त मंत्री
पूंजी बाजार में छोटे निवेशकों के कमजोर होते भरोसे पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि बाजार के हितों को सुरक्षित रखने के लिए सेबी निर्भीक होकर कार्य करे। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को किसी के समक्ष ‘झुकने’ की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि सेबी छोटे निवेशकों का भरोसा जीते। यह उस वक्त संभव हो पाएगा जब एक छोटा निवेशक यह कहे कि वित्तीय बाजार में उसका निवेश सुरक्षित है कि क्योंकि सेबी उसके पैसे की निगरानी कर रहा है। निवेशकों के लिए जब ऐसा दिन आ जाएगा, तो निश्चित रूप से सेबी सही मायने में अपने उद्देश्य को प्राप्त कर लेगा।
रजत जयंती बना रहे सेबी को अपने संदेश में चिदंबरम ने कहा कि बाजार नियामक को अपनी ताकत बढ़ानी चाहिए और एक भयमुक्त नियामक बनना चाहिए। सेबी न तो किसी के दबाव में आए, न ही किसी के सामने झुके। उन्होंने सेबी से अपने मानव संसाधन को भी मजबूत करने को कहा।
उन्होंने कहा कि देश, अर्थव्यवस्था व बाजार बहुत बड़ा है तथा यह और बड़ा होने की ओर अग्रसर है। हमें शेयर बाजार का नियमन करने के लिए 600 से अधिक पुरुष व महिलाओं की जरूरत है।