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सेल्फ फाइनेंस से रिंग रोड बनाने का बिजनेस मॉडल

Mon, 04 Feb 2013 11:29 PM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Mon, 04 Feb 2013 11:29 PM IST
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ring road busines model made from self finance

केंद्र सरकार ने रिंग रोड के लिए ली गई करीब 60 फीसदी जमीन भूमि मालिकों को वापस करने की वकालत की है। इतना ही नहीं यह जमीन पर्याप्त बुनियादी ढांचे के साथ सही आकार के प्लॉट के तौर पर लौटाने का सुझाव दिया है। इससे न सिर्फ जमीन देने वाले लोगों को फायदा होगा बल्कि रिंग रोड निर्माण का खर्च निकालने में भी मदद मिलेगी।

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महानगरों में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए शहरी विकास मंत्रालय ने राज्यों को सेल्फ फाइनेंस के जरिए रिंग रोड बनाने का रास्ता दिखाया है। इस तरह की रिंग रोड में प्रोजेक्ट फंड आसपास की 500 मीटर जमीन विकसित कर जुटाया जाएगा।
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शहरी विकास सचिव सुधीर कृष्णा ने हाल ही में राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सूरत की तर्ज पर सेल्फ फाइनेंस के जरिए रिंग रोड की योजना बनाने को कहा है। खास बात यह है कि ऐसी रिंग रोड न सिर्फ अपनी निर्माण लागत निकालेगी, बल्कि इसके लिए जमीन देने वाले लोगों को करीब 60 फीसदी जमीन प्लॉट के रूप में वापस मिल सकेगी।
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गौरतलब है कि अभी देश के कई महानगरों में रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर विवाद चल रहे हैं। जिसकी वजह से रिंग रोड परियोजनाएं अटकती जा रही हैं और लागत भी बढ़ रही है। अगर मुआवजे के अलावा भू-स्वामियों को अच्छे प्लॉट की पेशकश की जाती है, तो अधिग्रहण का विरोध कम हो सकता है।


अरबन प्लानर और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गर्वनमेंट से जुड़े अजय अग्रवाल का कहना है रिंग रोड के आसपास अभी भी जमीनों के दाम तेजी से बढ़ते ही हैं। अगर सरकार आसपास के क्षेत्र के बेहतर प्लानिंग करे और डेवलपरों को एफएसआई आदि में छूट दे, तो निर्माण खर्च आसानी से निकाला जा सकता है।

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