फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   RIL wants new gas price from 2012

रिलायंस ने की गैस कीमतें २०१२ से बढ़ाने की मांग

Tue, 22 Jul 2014 09:09 PM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली Updated Tue, 22 Jul 2014 09:09 PM IST
विज्ञापन

रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकार के बीच प्राकृतिक गैस की कीमतों का विवाद उलझता जा रहा है। इस मुद्दे पर सरकार को आर्बिटे्रशन नोटिस भेज चुकी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गैस की बढ़ी कीमतें वर्ष २०१२ से लागू करने की मांग रखी है। रंगराजन समिति ने १ अप्रैल, २०१४ से नई कीमतें लागू करने की सिफारिश की थी, जिस पर केंद्र सरकार को अभी फैसला लेना है। इस बारे में वित्त मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंत्रालय को पत्र लिखकर १ अप्रैल, २०१४ के बजाय वर्ष २०१२ से ही गैस की बढ़ी कीमतें लागू करने की मांग उठाई है। कंपनी ने वर्ष २०१२ के बाद ४.३२ डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस बेचने की वजह से भारी घाटे उठाने की बात कही है। इस घाटे के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए रिलायंस ने वर्ष २०१२ से ही नई गैस कीमतें लागू करने को कहा है। गौरतलब है कि जनवरी, २०१२ से ही गैस कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा जोर पकडऩे लगा था, लेकिन सरकार ने कीमतें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
विज्ञापन


नई कीमतों पर सरकार में मंथन शुरू
वित्त मंत्रालय ने पेट्रोलियम और ऊर्जा मंत्रालय समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ गैस की नई कीमतों पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार किसी नई समिति का गठन करने के बजाय मंत्रालयों के बीच बातचीत से ही इस मामले को हल करेगी। गैस की बढ़ी कीमतों की मार बिजली और फर्टिलाइजर कंपनियों पर पड़ेगी। इसलिए उनके पक्ष को भी सुना जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े लोगों का मानना है कि गैस की नई कीमतें पांच साल के बजाय अल्प अवधि के लिए तय की जा सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूरिया संयंत्रों के लिए मांगी ज्यादा गैस
उर्वरक मंत्रालय ने यूरिया संयंत्रों को ५० फीसदी ज्यादा प्राकृतिक गैस दिए जाने की मांग की है। इससे यूरिया संयंत्रों की आयातित एलएनजी गैस पर निर्भरता घटेगी और उर्वरक सब्सिडी में १५ हजार करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। उर्वरक सचिव इंद्रजीत पाल ने इस बारे में पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखा है। उन्होंने यूरिया क्षेत्रों को घरेलू गैस का आवंटन रोजाना ३.१५ करोड़ यूनिट के बढ़ाकर ३१.५ लाख टन करने की जरूरत बताई है। घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति न होने से यूरिया संयंत्रों के लिए तीन गुना महंगी इंपोर्टेड एलएनजी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।




विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed