आईपीओ बाजार में छोटे निवेशकों को पूंजी लगाना हुआ आसान
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अब सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियों में निवेशक कहीं ज्यादा पूंजी लगा सकेंगे। यहीं नहीं सरकार के लिए भी पूंजी जुटाना अब आसान होगा। देश की प्रमुख सरकारी कंपनियों कोल इंडिया, सेल, एनएचपीसी, एएमटीसी जैसी अहम कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचकर पूंजी जुटा सकेगी।
बृहस्पतिवार को सेबी को बोर्ड बैठक में यह फैसला किया गया है कि जिन सरकारी कंपनियों में सरकार की 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है, उनमें उसे अगले तीन साल में हिस्सेदारी 75 फीसदी तक लानी होगी। अभी यह सीमा 90 फीसदी थी। इस फैसले से देश की 30 से ज्यादा सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी सरकार बेच सकेगी। ऐसा करके सरकार द्वारा 50 हजार करोड़ रुपये से लेकर 60 हजार करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने का अनुमान है।
अलावा सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों को आईपीओ लाते समय कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में होगी। इस सीमा से कम हिस्सेदारी कंपनी तभी बेच सकेगी, जब उसका आईपीओ साइज 400 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का होगा।
रिटेल निवेशकों को निवेश का ज्यादा मौका देने के लिए सेबी ने ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) में इनकी हिस्सेदारी 10 फीसदी तय कर दी है। इसकेअलावा अब टॉप 100 की जगह टॉप 200 कंपनियां ओएफएस ला सकेंगी। साथ ही कंपनियां पिछले एक साल मेंं बोनस के रूप में दिए गए शेयर को भी ओएफएस में बेच सकेंगी। सेबी ने एंकर इनवेस्टर की सीमा 30 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी भी कर दी है।
इसी तरह अब सेबी के केवाईसी आंकड़ों को अब सभी नियामक इस्तेमाल कर सकेंगे। सेबी ने इसके अलावा ईशॉप नियमों को भी आसान करने की बात कही है। रिसर्च एनलिस्ट को भी अब सेबी के पास पंजीकरण कराना होगा। किसी भी कंपनी में दो लाख रुपये से कम निवेश करने वाले निवेशक रिटेल निवेशक कहलाता है।
किन सरकारी कंपनियों के आएंगे ऑफर कोल इंडिया लिमिटेड, एसजेवीएन, सेल, एनएचपीसी, एचएमटी, एसटीसी, एमएमटीसी, एनएफएल, एनएमडीसी, इंडियन बैंक , हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड , नेवेली लिग्नाइट आदि में हिस्सेदारी 75 फीसदी तक कम कर सरकार 50000 से 60000 करोड़ रुपये अगले तीन साल में जुटा सकेगी।
प्रमुख बातें-- -सेबी ने नियम किए आसान -सरकारी कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी घटकर होगी 75 फीसदी -हर आईपीओ में कंपनी को कम से कम 25 हिस्सेदारी बेचनी होगी -ओएफएस में रिटेल निवेशकों की होगी 10 फीसदी हिस्सेदारी -वित्त मंत्रालय ने रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने का दिया था सुझाव -25 फीसदी सीमा तय करने से एलआईसी के आईपीओ पर पड़ सकता है असर
कोट-- सेबी चेयरमैन यू.के.सिन्हा ने बोर्ड बैठक के बाद कहा कि पूंजी जुटाने का फैसला कंपनियों का होता है, पिछले तीन साल में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के डीआरएचपी फाइल किए गए, लेकिन बाद में कंपनियों ने विभिन्न परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें वापस लिया है। ऐसे में नियम कंपनियों के सोच में बदलाव नहीं ला सकते हैं।