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रिजर्व बैंक मार्च तक नहीं घटाएगा ब्याज दरें

Wed, 31 Oct 2012 07:16 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 31 Oct 2012 07:16 PM IST
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Reserve Bank will not reduce interest rates till march

देश के मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मॉर्गन स्टेनले ने आसार जताया है कि चालू वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक मूल दरों में कोई कटौती नहीं करेगा। दूसरी तिमाही की ऋण एवं मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती नहीं करने पर सरकार और उद्योग जगत की आलोचना झेल रहे भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए मॉर्गन स्टेनले ने कहा है कि वर्ष के अंत इसकी कोई गुंजाइश नहीं है।

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आरबीआई ने मंगलवार को मध्यावधि समीक्षा के दौरान रेपो दर और रिवर्स रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया, जबकि नकद सुरक्षित अनुपात में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती कर दी। इससे बैंकिंग तंत्र तकरीबन 17,500 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।
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आरबीआई ने महंगाई के दबाव का हवाला देकर अपनी रुख को सही ठहराया, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह ने इस पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए नीतिगत दरों को घटाना चाहिए था।
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मॉर्गन स्टेनले ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरबीआई मौद्रिक नीति पर जो रुख अख्तियार किया है, उस पर हमारा मानना है कि नीतिगत ब्याज दरों में वर्ष 2012 तक कोई परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। वर्ष 2013 की पहली तिमाही में ही नीतिगत दरों में ढील की कोई उम्मीद की जा सकती है।

आरबीआई की समीक्षा में विकास की ओर ध्यान दिया गया, लेकिन ऊंची महंगाई दर ज्यादा हावी रही। मुद्रास्फीति के सभी संकेत बढ़त कर रुख किए हुए हैं और मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही मुद्रास्फीति की दर सात प्रतिशत से ऊपर रही है, जबकि आरबीआई के अनुसार यह पांच प्रतिशत से लेकर 5.5 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2012 तक मुद्रास्फीति की दर आठ प्रतिशत से साढे़ आठ प्रतिशत के बीच पहुंच जाने की संभावना है। हालांकि मार्च 2013 तक यह घटकर 7.5 प्रतिशत पर आ सकती है। ऐसी स्थिति पर आरबीआई के पास मौद्रिक उपाय के तौर पर नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश बहुत कम होगी।

मोर्गन स्टेनले ने कहा है कि वर्ष 2013 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति का दबाव कम होना शुरू हो जाएगा। हालांकि मुद्रास्फीति की दर पूरे वर्ष आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर बनी रहेगी। इसी अवधि में आरबीआई नीति गत दरों में आधा प्रतिशत से लेकर तीन चौथाई प्रतिशत तक घटा सकता है।

वित्तीय संस्थान ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी। मौद्रिक नीति में उदारता बरतने से मौजूदा परिस्थितियों में आर्थिक विकास को गति नहीं मिलेगी। इसके लिए अर्थव्यवस्था में नीतिगत सुधार करने होंगे।

इसके लिए सरकार को निवेश बढ़ाने के प्रयासों को तेज करना होगा। राजकोषीय घाटा कम करने के लिए खर्चों में कटौती करनी होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी बढ़ानी होगी। इससे अर्थव्यवस्था के विकास में मदद मिलेगी।

तरलता पर कुछ महीने और दबाव रहेगा
नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती कर बैंकिंग तंत्र में 17,500 करोड़ रुपये की तरलता बढ़ाने के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि अगले कुछ महीने तक तरलता पर दबाव बना रहेगा।

रिजर्व बैंक ने चालू वित वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की मध्यावधि समीक्षा के दौरान सीआरआर को 4.5 प्रतिशत से कम कर 4.25 प्रतिशत कर दिया जिससे तीन नवंबर से तंत्र में 17,500 करोड़ रुपये का प्रवाह बढ़ जायेगा। हालांकि केन्द्रीय बैंक ने महंगाई बढ़ने की संभावना जताते हुये अल्पकालिक ऋण दरो रेपो और रिवर्स रेपो में कोई बदलाव नहीं किया।

सुब्बाराव ने कहा कि तरलता की तंगी का दबाव बैंकिंग तंत्र पर अगले कुछ महीने तक रहने का अनुमान है। रुपये में हो रहे उतार-चढ़ाव के मद्देनजर उन्होंने कहा कि सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए केन्द्रीय बैंक मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप नहीं करेगा।


पिछले महीने सरकार द्वारा किये गये आर्थिक सुधार के उपायों और बहु ब्रांड खुदरा कारोबार सहित कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोलने की घोषणा किये जाने के बाद रुपये में मजबूती आई थी और इसके 50 रुपये प्रति डालर से नीचे का अनुमान जताये जाने लगा था। लेकिन अक्टूबर में रुपया 1.85 प्रतिशत तक फिसल चुका है और यह 53.87 रुपये प्रति डालर पर अभी कारोबार कर रहा है।

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