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धार्मिक संस्थाओं के लिए रियायती दर पर रसोई गैस
नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय
Updated Sat, 09 Feb 2013 12:57 AM IST
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अब कुंभ को धार्मिक समागम का स्थल कहें या सियासत का मेला कि केंद्र सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा का हवाला देकर धार्मिक संस्थाओं के इस्तेमाल के लिए रसोई गैस की कीमत में भारी भरकम कटौती कर दी है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कुंभ श्रद्धालुओं के लिए सस्ती कीमत दर पर रसोई गैस की व्यवस्था हो सके।
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सरकार ने धार्मिक संस्थाओं, रक्षा क्षेत्र, अस्पतालों, स्कूलों जैसी संस्थाओं के लिए एलपीजी की उच्चतम कीमत को अब सामान्य घरेलू गैस कनेक्शन की श्रेणी में बदल दिया है। कुछ माह में ही अपने फैसले पर यू-टर्न लेते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकारी तेल कंपनियों को तत्काल प्रभाव से संशोधित दरें लागू करने का निर्देश दिया है।
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यानी दिल्ली में गैर घरेलू छूट प्राप्त श्रेणी (एनडीईसी) को 1156 रुपये में मिलने वाले एक सिलेंडर की कीमत अब 410 रुपये होगी। उन्हें रियायती दर पर सालाना नौ सिलेंडर ही मिलेंगे। इससे अधिक सिलेंडर पर सामान्य गैर रियायती दर का भुगतान करना होगा।
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माना जा रहा है कि सरकार ने सियासी दबाव में पहले रियायती घरेलू गैस की संख्या छह से बढ़ाकर नौ करने का ऐलान किया और अब धार्मिक समेत दूसरी संस्थाओं को सब्सिडी प्राप्त कीमत पर एलपीजी देने का फैसला लिया गया है।
मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो फैसले के पीछे मिड-डे मील योजना की लागत भी एक कारण है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के फैसले से यह साफ नहीं हो पाया है कि ऐसे ग्राहक जिन्हें केवाईसी के अभाव में रसोई गैस की उच्चतम कीमत अदा करनी पड़ रही है उन्हें अब किस दर पर रसोई गैस मुहैया कराई जाएगी।
दरअसल, पहले केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले करीब एक करोड़ ग्राहकों को विशेष श्रेणी के लिए गैर रियायती दरों पर रसोई गैस देने का निर्णय लिया गया था। उम्मीद की जा रही थी कि इससे तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा एलपीजी सब्सिडी की बचत होगी।
गौरतलब है कि तेल कंपनियों के घाटे का रोना रोकर पिछले साल एलपीजी के लिए तीन श्रेणी ईजाद करने वाले पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि इससे तेल कंपनियों का नुकसान कम हो सकेगा। मगर अब सरकार लगातार अपने पुराने फैसलों में संशोधन करती जा रही है।