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निर्णायक दौर में पहुंचा रिलायंस-ओएनजीसी गैस चोरी विवाद

Mon, 18 Aug 2014 12:19 AM IST
अजीत सिंह/नई दिल्ली
अजीत सिंह/नई दिल्ली Updated Mon, 18 Aug 2014 12:19 AM IST
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Reliance-ONGC gas dispute reached the decisive stage

कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन में रिलायंस इंडस्ट्री और ओएनजीसी के बीच गैस चोरी विवाद निर्णायक दौर में पहुंच गया है। ओएनजीसी की ओर से रिलायंस पर लगाए गए उसके तेल ब्लॉक से गैस चोरी के आरोपों की जांच का जिम्मा कनाडा की एक स्वतंत्र एक्सपर्ट एजेंसी डीएंडएम को सौंपा गया है। इस जांच से साफ हो जाएगा कि रिलायंस ने केजी बेसिन में अपने डी-6 ऑयल ब्लॉक से सटे ओएनजीसी के तेल क्षेत्र से कितनी गैस निकाली है।

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इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय के रुख पर भी सबकी निगाहें टिकी हैं। देखना होगा कि मंत्रालय करीब 30 हजार करोड़ रुपये की गैस चोरी के इस मामले में ओएनजीसी का साथ देता है या फिर रिलायंस के पक्ष में खड़ा होता है। नई गैस कीमतों के निर्धारण के बाद गैस चोरी का यह मामला पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले महीने केजी बेसिन में गैस चोरी के मामले की जांच कनाडा की एक्सपर्ट एजेंसी डीएंडएम को सौंपे जाने के बाद जांच के बिंदु तय हो चुके हैं।
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इस मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय और डीजी हाईड्रोकार्बन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए ओएनजीसी ने गत 15 मई को दिल्ली हाईकोर्ट में एक यचिका दायर की थी। इसपर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट भारत सरकार, डीजी हाईड्रोकार्बन और रिलायंस इंडस्ट्रीज को नोटिस भेज चुका है। अब मामले की स्वतंत्र जांच शुरू होने से रिलायंस पर लगे गैस चोरी के आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। रिलायंस शुरू से ही ओएनजीसी के आरोपों को सिरे से नकारता रहा है।
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ओएनजीसी का आरोप है कि रिलायंस द्वारा उसके ऑयल ब्लॉक में सेंधमारी से उसे करीब 30 हजार करोड़ रुपये की गैस का नुकसान उठाना पड़ा है। ओएनजीसी ने हाईकोर्ट की निगरानी में मामले की जांच केलिए एक स्वतंत्र एक्सपर्ट एजेंसी नियुक्ति करने की मांग की थी। गौरतलब है कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन में रिलायंस और ओएनजीसी के तेल ब्लॉक आसपास हैं। ओएनजीसी का आरोप है कि रिलायंस अपने डी-6 ब्लॉक के तेल कुओं से चोरी छिपे उसके गोदावरी पीएमएल और केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 ब्लॉक की गैस खींच रहा है।


इस विवाद के हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद ओएनजीसी की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच का प्रस्ताव 4 इंटरनेशनल एजेंसियों को भेजा गया था, जिनमें से सिर्फ दो एजेंसियों ने जांच में दिलचस्पी दिखाई है। मिली जानकारी के मुताबिक गत जुलाई में ओएनजीसी, रिलायंस और डीजी हाईड्रोकार्बन ने जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी डीएंडएम के साथ प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है। इसके बाद जांच के बिंदु (टर्म ऑफ रेफरेंस) तय कर जांच-पड़ताल का काम शुरू हो चुका है। इस जांच में डीजी हाईड्रोकार्बन प्रोजेक्ट समन्वयक की भूमिका निभा रहा है।

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