रिलायंस म्यूचुअल फंड की 600 जिलों में पहुंच बनाने की योजना

हरवीर सिंह/दुबई Updated Mon, 15 Oct 2012 08:26 PM IST
reliance mutual fund plans to reach 600 districts
देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (आरसीएएस) की रणनीति अगले पांच साल में देश के सभी करीब 600 जिलों में पहुंच बनाने की है। इस समय कंपनी देश के 200 शहरों में मौजूद है और अगले दो साल में इन शहरों की संख्या बढ़ा कर 600 करने की कंपनी की रणनीति है। उसके बाद करीब तीन साल में कंपनी देश के सभी जिलों में अपनी पहुंच बनाने तैयारी में है।

रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट के प्रसिडेंट और सीईओ संदीप सिक्का ने यहां कंपनी की एक कांफ्रेंस के बाद अमर उजाला के साथ बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस उद्योग में जो ग्रोथ आएगी वह छोटे शहरों से ही आएगी और इस समय अधिकांश म्यूचुअल फंड केवल 15 बड़े शहरों तक सीमित हैं। हाल ही में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्र्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने भी म्यूचुअल फंड उद्योग से संबंधित प्रावधानों में बदलाव करते हुए छोटे शहरों के निवेशकों तक पहुंचने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने के प्रावधान किए हैं।

उन्होंने कहा कि यह उद्योग पिछले दस साल में ही में सेबी ने उद्योग से संबंधित बदलाव किए हैं साथ ही देश में निवेशकों की निवेश के फैसले लेने की आदतों में बदलाव हो रहा है। इसके चलते जहां 2003 से अभी तक म्यूचुअल फंड उद्योग सात लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचा है, वहीं इसके 2020 तक बीस लाख करोड़ पर पहुंच जाने की संभावना है। यह ग्रोथ इन 15 शहरों से नहीं आएगी जहां अभी इसकी 80 फीसदी से ज्यादा मौजूदगी है। बल्कि यह छोटे शहरों और कस्बों से आएगी, जिसके लिए उद्योग को अपनी रणनीति बदलनी होगी।

जहां तक रिलायंस कैपिटल का सवाल है तो हम पहले से ही इस दिशा में बढ़ रहे हैं और सेबी का यह प्रावधान हमारे लिए बेहतर साबित होगा। इस समय रिलायंस कैपिटल के पास प्रबंधन के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये के एसेट हैं जिसमें 86,000 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड के तहत हैं। बाकी 65,569 करोड़ रुपये मैजेच्ड अकाउंट में हैं और 4200 करोड़ रुपये विदेशी फंड के तहत हैं। आने वाले दिनों में फिक्स एसेट के फाइनेंशियल एसेट में बदलने का दौर तेज होगा और उसी का फायदा म्यूचुअल फंड उद्योग के विकास में मिलेगा।

सिक्का ने निवेश और बाजार से संबंधित एक प्रजेंटेशन में बताया कि इस आम आदमी की बचत का करीब 56 फीसदी बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में जाता है, जबकि इक्विटी में केवल तीन फीसदी आता है। नौ फीसदी पेंशन और प्राविडेंट फंड में जाता है, जबकि 12 फीसदी करेंसी में जाता है, जिसमें बचत खाता शामिल है। करीब 20 फीसदी बचत पेंशन में जाती है। इसमें आने वाले दिनों में बदलाव होगा, क्योंकि बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट के बजाय म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना बेहतर है।

सिक्का कहते हैं कि हमने जापान की कंपनी निप्पान के साथ साझेदारी की है और निप्पान दुनिया की सबसे बड़ी फंड मैनेजरों में शुमार होती है और उसके अनुभव का फायदा हमें मिलेगा। असल में लोग म्यूचुअल फंड को केवल इक्विटी से जोड़कर देखते हैं, जो सही नहीं है। इक्विटी उसका केवल एक हिस्सा है।

इसके अलावा इसमें डेट (ऋणपत्रों में निवेश) बांडों में निवेश है गोल्ड फंड में निवेश है। यह पूरी तरह निवेशक की जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया पोर्टफोलियो है। इसे इसी रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए बड़े पैमाने पर निवेशकों को शिक्षित करने की जरूरत है।

सेबी भी इस पर जोर दे रहा है और रिलायंस कैपिटल में इसे तेजी अपना रहे हैं। जानकार निवेशक हमारे लिए फायदेमंद  है क्योंकि हम उसे समझा सकते हैं कि उसके पैसा पर हम बैंक से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं और साथ ही उसे स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। अगले कुछ साल में वह इस उद्योग के लिए 12 फीसदी सालाना की उम्मीद करते हैं।

वहीं रिलायंस कैपिटल के इक्विटी डिविजन के प्रमुख सुनील सिंघानिया का कहना है कि बाजार में हालात सुुधर रहे हैं और हमें आने वाले दिनों की बेहतर संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश का फैसला लेना चाहिए। यही वजह है कि अकेले सितंबर माह में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में करीब में 3.5 अरब डालर का निवेश किया है, जबकि जनवरी से सितंबर तक का निवेश 16 अरब डॉलर रहा है। इससे साबित होता है कि विदेशी निवेशक भारत को लेकर काफी गंभीर हैं।

Spotlight

Related Videos

भारतीय डांक में निकलीं 2,411 नौकरियां, ऐसे करें अप्लाई

करियर प्लस के इस बुलेटिन में हम आपको देंगे जानकारी लेटेस्ट सरकारी नौकरियों की, करेंट अफेयर्स के बारे में जिनके बारे में आपसे सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं या इंटरव्यू में सवाल पूछे जा सकते हैं और साथ ही आपको जानकारी देंगे एक खास शख्सियत के बारे में।

24 जनवरी 2018