बैंकों में पूंजी डालने की योजना को तीन साल का विस्तार मिला
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी अपने पैर पर खड़े हो सकें, इसके लिए उसमें सरकार ने और पूंजी डालने की योजना को तीन साल और बढ़ाने का फैसला किया है।
इससे बैंक के कैपिटल टू रिस्क वेटेज असेट रेशियो (सीआरएआर) में सुधार होगा और यह 9 फीसदी तक पहुंच जाएगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की यहां हुई बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में फिर से पूंजी डालने की योजना को अगले तीन साल का विस्तार मिल गया। अब रिकैपिटलाइजेशन की योजना वर्ष 2016-17 तक चलती रहेगी।
सरकार का फाइनेंसियल इंक्लूजन होगा सफल
उन्होंने बताया कि बैंकों की आर्थिक हालत ठीक रह सके, इसके लिए सीआरएआर 9
फीसदी होना जरूरी है। लेकिन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का सीआरएआर 9 फीसदी
नहीं है। इसलिए उन बैंकों में नई पूंजी डालने की योजना वर्ष 2010-11 में
शुरू हुई थी।
इसे अगले तीन वर्ष के लिए और बढ़ा दिया गया। जब ये बैंक मजबूत
होंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में वे बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे और सरकार
का फाइनेंसियल इंक्लूजन का कार्यक्रम सफल हो पाएगा।
उल्लेखनीय है कि
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कानून 1976 के तहत इन बैंकों की स्थापना हुई है। उस
समय इसे कोओपरेटिव क्रेडिट स्ट्रक्चर का विकल्प माना गया था। इन बैंकों
में भारत सरकार के साथ साथ राज्य सरकारों की भी हिस्सेदारी है जबकि हर बैंक
का कोई न कोई स्पांसर बैंक है।