फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   reform must to tame prices of vegetables

सब्जियों की कीमतों पर अंकुश के लिए सुधार जरूरी: कट्स इंटरनेशनल

Fri, 01 Aug 2014 08:41 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Fri, 01 Aug 2014 08:41 AM IST
विज्ञापन
reform must to tame prices of vegetables
सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के कारण उपभोक्ता और उत्पादक दोनों पर इसकी मार पड़ रही है। कट्स इंटरनेशनल द्वारा की गई स्टडी से पता चलता है कि मॉडल एक्ट लागू होने के एक दशक बाद भी कृषि बाजार की बाधाएं सुलझाई नहीं जा सकी हैं।
विज्ञापन


राज्य सरकारों ने मॉडल एक्ट की तर्ज पर अपने राज्यों में सुधार नहीं किया और निजी निवेश को प्रोत्साहन देने में असफल रहीं। कट्स की स्टडी में टमाटर को प्रतिनिधि कमोडिटी के तौर पर प्रयोग करते हुए दो राज्यों महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में कृषि विपणन पर फोकस करती है।
विज्ञापन


इस स्टडी से हाल में टमाटर की कीमतों में आई तेजी के बारे में अहम तथ्य पता चलते हैं। प्याज की कीमतें देश भर में बढ़ी हैं। जुलाई 2014 के आखिरी सप्ताह में जहां भोपाल में टमाटर की सबसे ज्यादा कीमत 85 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई वहीं दिल्ली में इसकी कीमत 70 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा बाजार के सूत्रों ने खुलासा किया हे कि टमाटर की कीमतें बढ़ कर 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है। टमाटर की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी के लिए मानसून में देरी, टमाटर उत्पादक इलाकों में कम बारिश और आपूर्ति में कमी जैसे कारणों का हवाला दिया जा रहा है वहीं कृत्रिम महंगाई के लिए कृषि विपणन पर भारत के नियामकीय पहलू को जिम्मेदार माना जा रहा है।

कृषि राज्य का विषय है। ऐसे में केंद्र सरकार के कानून जैसे मॉडल एपीएमसी एक्ट तब तक अप्रभावी हैं, जब तक राज्य सरकारें इसे अपने राज्य में लागू न करें। कट्स स्टडी से पता चलता है कि महाराष्ट्र ने एपीएमसी एक्ट में संशोधन करते हुए डायरेक्ट मार्केटिंग, कांट्रैक्ट फार्मिंग और प्राइवेट मार्केट जैसी सुविधाओं के लिए रास्ता खोला है, लेकिन अब भी नियंत्रित बाजारों का एकाधिकार होने से कीमतों में कृत्रिम तेजी लाई जा रही है।


इसका असर पूरे देश पर पड़ता है। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र और हिमाचल से ज्यादातर टमाटर की आपूर्ति पाने वाला राजस्थान इसका शिकार बना है जहां जून में टमाटर की थोक कीमत 4-6 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो जुलाई में बढ़ कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed