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जमा पर ब्याज घटने से सस्ता होगा कर्ज: मूंदड़ा

Sat, 06 Jul 2013 12:25 AM IST
नई दिल्ली/हरवीर सिंह
नई दिल्ली/हरवीर सिंह Updated Sat, 06 Jul 2013 12:25 AM IST
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reduction interest on deposits loan would be cheaper says mundra

बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) ने हाल ही में सभी नए और पुराने ग्राहकों और हर आकार के होम लोन पर ब्याज की समान दर लागू की है। बैंक का मानना है कि इससे होम लोन पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी होगी।

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ब्याज दरों में कटौती पर बैंक का मानना है कि जमा और कर्ज की ब्याज दरों के बीच संतुलन को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में अधिक कटौती की गुंजाइश नहीं है।

बैंकिंग और अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर अमर उजाला के सीनियर एडिटर हरवीर सिंह की बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एसएस मूंदड़ा से हुई लंबी बातचीत के अंश:
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थोक महंगाई दर के कम होने और कमजोर विकास दर के माहौल में ब्याज दरों में कटौती की संभावना पर आप क्या कहना चाहेंगे?
देखिये अभी भी महंगाई दर ऊंची बनी हुई है, खासतौर से खुदरा महंगाई दर। दूसरी बड़ी चिंता ऊंचा चालू खाता घाटा (सीएडी) है। रिजर्व बैंक ने भी कहा है कि इन दोनों को ध्यान में रखते हुए ही ब्याज दरों में कटौती का कोई फैसला लिया जाएगा। जहां तक बैंकों का सवाल है, तो उनको बैलेंस शीट भी देखनी है। उसके लिए उन्हें जमाकर्ताओं और कर्ज लेने वाले लोगों के बीच संतुलन बनाना होता है। अभी लिक्विडिटी भी कुछ कम है, जबकि महंगाई दर ऊंची बनी हुई है। फिलहाल जमा दरों में कमी की गुंजाइश कम है। कुछ बैंकों ने जमा दरों में कमी की थी, लेकिन उनके डिपॉजिट घट गए थे और उन्हें जमा पर ब्याज दरों को पुराने स्तर पर लाना पड़ा। ऐसे में कर्ज पर ब्याज घटाने का सीधा असर बैंकों के मुनाफे पर पड़ेगा।
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लिक्विडिटी बढ़ने की क्या संभावना है और अगर यह सुधरती है, तो क्या ब्याज दरें घटेंगी?
पिछले दिनों सरकार का खर्च घटने से लिक्विडिटी कुछ कम हो गई थी, लेकिन अब सरकार खर्च बढ़ा रही है, तो उससे खुद ही लिक्विडीटी में सुधार आएगा। लिक्विडिटी बढ़ने और महंगाई घटने से जमा दरों में कुछ कमी आ सकती है। ऐसे में मुझे उम्मीद है कि आगामी 30 जुलाई को मौद्रिक नीति की समीक्षा में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कुछ कटौती करेगा, जिसका फायदा बैंक उपभोक्ताओं को देंगे।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने सभी अवधि और ग्राहकों के लिए होम लोन की ब्याज दर को समान कर दिया है इसके पीछे क्या रणनीति है?

इस कदम से हमें अपना रिटेल पोर्टफोलियो बढ़ाने में मदद मिलेंगी। वैसे भी मेरा मानना है कि होम लोन एक कमोडिटी की तरह है। हमें इसका वाल्यूम बढ़ाने का फायदा है।

सरकार ने हाल ही में एफडीआई को लेकर बड़ी परियोजनाओं पर अमल से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं उसके चलते क्या विकास दर में बढ़ोतरी की संभावना बन रही है?
पहली तिमाही में तो कुछ ज्यादा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन जिस तरह से अटकी परियोजनाओं और नई परियोजनाओं को पटरी पर लाने के लिए सरकार पहल कर रही है, अगर उसमें से कुछ पर भी अमल हो जाता है तो उससे हालात तेजी से बदलेंगे।

कृषि कर्ज को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इसका एक बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट को जाता है?

कृषि क्षेत्र के लिए तय 18 फीसदी की सीमा को हम पूरा करते हैं। इसमें से 13.5 फीसदी किसान को सीधे जाता है, जबकि बकाया हिस्सा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए जाता है। बैंक ऑफ बड़ौदा इन मानकों का पालन करता है।


बैंक के मुनाफे को लेकर क्या बदलाव देखने को मिल सकता है?
मैं अभी इस बारे में बहुत कुछ नहीं कहूंगा। पहली दो तिमाही तक कोई बड़ा अंतर नहीं आएगा उसके बाद ही हम कुछ अंतर देख पाएंगे। नए बैंकों को लाइसेंस मिलने वाले हैं उसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अधिकारी बड़ी संख्या में नए बैंकों में जा सकते हैं?

आपने बैंक ऑफ बड़ौदा में कुछ ढांचागत बदलाव किए गए हैं उसके पीछे क्या वजह है?

वैसे तो बैंक का सिस्टम बहुत बेहतर है, लेकिन जिस तरह से बैंक का कारोबार बढ़ रहा है उसे देखते हुए शीर्ष स्तर पर कुछ नियुक्तियां की गई हैं। जैसे एक चीफ जनरल मैनेजर को मुख्यालय में नियुक्त किया गया है। उनको गवर्नमेंट बिजनेस का जिम्मा दिया गया है। जिस तरह से सरकारी बिजनेस बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर का दायरा बढ़ेगा उसमें बैंकों की भूमिका बढ़ रही है।

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