दीपावली की धूम से महरूम रहा रीयल्टी बाजार

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 15 Nov 2012 10:39 PM IST
realty market slowed down at diwali
बिल्डरों और डेवलपरों की ओर से तमाम तरह के ऑफरों और व्यापक स्तर पर की गई मार्केटिंग के बावजूद इस बार देश में रीयल्टी कारोबार दीपावली की धूम से महरूम रहा। उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक मकानों की ऊंची कीमत रीयल्टी कारोबार की सुस्ती की प्रमुख वजह बन रही।

रिपोर्ट के मुताबिक रीयल्टी क्षेत्र दोहरे संकट की मार झेल रहा है। दीपावली के मौके पर इस साल रीयल्टी क्षेत्र की मांग में प्रति महीने की औसत बिक्री की तुलना में महज 20 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि बिल्डर और निवेशक इसमें 100 प्रतिशत बढ़त की उम्मीद लगाए बैठे थे। सर्वेक्षण दिल्ली (एनसीआर), हैदराबाद, पुणे, चंडीगढ़ और देहरादून में करवाया गया। इसके तहत इन शहरों के जाने माने 40 बिल्डरों और डेवलपरों  होम लोन देने वाली 20 कंपनियों से बातचीत की गई।

ज्यादातर बिल्डरों की शिकायत थी कि विभिन्न नियामकों और अधिकारियों की ओर से जरूरी मंजूरी समय पर नहीं मिलने के कारण भवन और मकानों का निर्माण कार्य देर होने के साथ ही मंहगा भी साबित हो रहा है। इसके साथ ही रीयल्टी क्षेत्र को अभी तक उद्योग का दर्जा नहीं मिलने से वित्तीय मदद जुटाना भी मुश्किल भरा काम बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक नए मकानों के साथ ही पुराने मकानों की बिक्री भी प्रभावित हो रही है।

बाजार के जानकारों के मुताबिक हालत यही रही तो अगले सात मार्च तक जमीन, मकानों और फ्लैटों की मांग 15 से 20 प्रतिशत तक घट जाएगी। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस वक्त कई बड़ी रियलटी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बड़ी संख्या में यहां मकान तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन मांग उस हिसाब से नही हैं, जिससे बिल्डरों में हताशा है। एसोचैम ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार को सुझाव दिया है कि वह रीयल एस्टेट परियोजनाओं के लिए एक नियामक के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक मददगार के रूप में भी काम करे, खासकर उन क्षेत्रों में, जहां मांग आपूर्ति से ज्यादा है।

उद्योग संगठन ने कहा है कि सरकारी एजेंसियों को चाहिए कि वह उन निर्माण परियोजनाओं की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराए, जिन्हें नियामक मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकारें अपने यहां के जमीन के सभी रिकॉर्डों का कप्यूटरीकरण भी करवाएं, जिससे निर्माण परियोजनाओं के लिए जमीन हासिल करने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकेगी। साथ ही सरकार रीयल्टी क्षेत्र को जल्दी उद्योग का दर्जा दे, ताकि उसे अन्य उद्योगों के समान ही रियायतें और सुविधाएं मिल सकें।

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