फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   rbi will not give loan to banks very easily

RBI बैंकों को भी नहीं देगा आसानी से लोन?

Fri, 03 Jan 2014 08:45 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Jan 2014 08:45 PM IST
विज्ञापन
rbi will not give loan to banks very easily

बैंकों के डूबते कर्ज की संख्या में तेजी से हो रहा इजाफा उनके लिए नए कर्ज देने में परेशानी का सबब बन सकता है।

विज्ञापन


भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय लगातार इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि बैंकों की बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए खतरे का संकेत हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंकों के लिए कर्ज देने की सीमा के नियमों में बदलाव हो सकता है। जिसमें बैंक के कारोबार के आधार पर उनके लिए कर्ज देने की सीमा तय हो सकती है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने दिसंबर में जारी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा है कि बैंकिंग सेक्टर के एसेट पर प्रतिकूल असर पड़ने की एक प्रमुख वजह बड़े कॉरपोरेट द्वारा कर्ज चुकाने में असफल होना रहा है। रिजर्व बैंक के अनुसार ज्यादातर बैंकों का एक्सपोजर बड़े कॉरपोरेट्स से है। जिसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह बैंकों के कर्ज देने की सीमा के मौजूदा नियम की समीक्षा कर सकता है।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार बढ़ते जोखिम को देखते हुए रिजर्व बैंक बैंकों के कारोबार के साइज को देखते हुए उनके कर्ज देने की सीमा का एक विकल्प तय कर सकता है। जिसके तहत यह तय हो सकता है कि कोई बैंक किसी एक कंपनी को अपनी कुल पूंजी का कितना फीसदी तक कर्ज दे सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसी तरह किसी समूह को कितनी फीसदी तक कर्ज दे सकेगा। अभी सभी बैंकों के लिए कर्ज की सीमा समान है, जिसके तहत कोई बैंक अपने कुल पूंजी का 25 फीसदी तक किसी एक कंपनी को कर्ज दे सकता है। जबकि किसी समूह को कुल पूंजी का 55 फीसदी तक कर्ज दे सकता है।

एसबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रिजर्व बैंक समय-समय पर बैंकों के कर्ज की समीक्षा करता है। इसके तहत रिजर्व बैंक ने बैंकों के कारोबार के आधार पर बैंकों के वर्ग तय कर रखे हैं।


सीडीआर के मामलों में रिकार्ड बढ़ोतरी
जो कंपनियां बैंकों के कर्ज नहीं चुका पाती हैं, वह कर्ज चुकाने में राहत पाने के लिए कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चिरंग (सीडीआर) सेल में आवेदन करती हैं। सितंबर 2013 तक के आंकड़ों सितंबर तक कुल 431 मामले स्वीकृत हो चुके हैं। जिन पर 2,72,286 करोड़ रुपये का ऐसा कर्ज हैं, जो कंपनियां बैंकों को नहीं चुका पा रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed