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रुपये में भारी उठापटक पर रिजर्व बैंक देगा दखल
मुंबई/एजेंसी
Updated Tue, 16 Oct 2012 07:42 PM IST
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रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एचआर खान ने कहा है कि रुपये में भारी उतार-चढ़ाव आने की स्थिति में आरबीआई मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करेगा। पहले भी रिजर्व बैंक ने ऐसी स्थिति में दखल दिया है। खान ने कहा कि मुद्रा बाजार में बड़े पैमाने पर उठापटक की स्थिति में रिजर्व बैंक ने पहले भी रुपये को संभालने के लिए विनिमय बाजार में दखल दिया है।
हालांकि, खान ने बताया कि केंद्रीय बैंक की नीति मुद्रा विनियम बाजार में हस्तक्षेप करने की नहीं है और बाजार को ही विनिमय दरें तय करने का अधिकार है। रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए नीतिगत और रणनीतिक दोनों तरह के उपाय किए। सरकार ने भी अपनी तरह से कुछ कदम उठाए हैं। मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति संबंधी प्रबंधन किए जाने की जरूरत है।
राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने की जरूरत
खान ने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने की जरूरत है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए उपाय किए जाने चाहिए। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक उपाय करने की जरूरत है। यह संयुक्त प्रयास से संभव है। यह किसी एक नीति या उपाय से संभव नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय घाटा चिंता विषय का है। इसे तुरंत नियंत्रित करने की जरूरत है।
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इससे पहले, केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने भी कहा था कि राजकोषीय घाटा चिंता का विषय है और इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। सरकार इसे कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले सरकार के एक पैनल ने कहा है कि मार्च 2013 तक वित्तीय घाटा कुल जीडीपी का 6.1 फीसदी तक पहुंच सकता है।
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हालांकि, खान ने बताया कि केंद्रीय बैंक की नीति मुद्रा विनियम बाजार में हस्तक्षेप करने की नहीं है और बाजार को ही विनिमय दरें तय करने का अधिकार है। रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए नीतिगत और रणनीतिक दोनों तरह के उपाय किए। सरकार ने भी अपनी तरह से कुछ कदम उठाए हैं। मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि महंगाई दर को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति संबंधी प्रबंधन किए जाने की जरूरत है।
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राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने की जरूरत
खान ने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने की जरूरत है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए उपाय किए जाने चाहिए। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक उपाय करने की जरूरत है। यह संयुक्त प्रयास से संभव है। यह किसी एक नीति या उपाय से संभव नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय घाटा चिंता विषय का है। इसे तुरंत नियंत्रित करने की जरूरत है।
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इससे पहले, केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने भी कहा था कि राजकोषीय घाटा चिंता का विषय है और इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। सरकार इसे कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले सरकार के एक पैनल ने कहा है कि मार्च 2013 तक वित्तीय घाटा कुल जीडीपी का 6.1 फीसदी तक पहुंच सकता है।