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तो बैंकों को इसलिए फटकार लगाएगा आरबीआई
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 23 Dec 2013 07:57 PM IST
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एटीएम और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से जुड़ी दिक्कतों को लेकर बैंकों के खिलाफ ग्राहकों की बढ़ रही शिकायतों और उनके निपटारे में हो रही देरी बैंकों लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
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भारतीय रिजर्व बैंक पिछले दो वर्षों में शिकायत में बढ़े इजाफे को देखकर, इनकी समीक्षा कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंकों के लिए रिजर्व बैंक कड़े प्रावधान कर सकता है, जिससे ग्राहकों की शिकायतों में न केवल कमी आ सके, बल्कि उनका निपटारा जल्द से जल्द हो सके।
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भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2012-13 में करीब 70 हजार शिकायतें बैंकिंग सेवाओं को लेकर बैंकिंग लोकपाल के पास पहुंची हैं। इसके तहत एटीएम के जरिए होने वाले लेनदेन और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा शिकायतें हुई हैं।
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रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार साल 2011-12 की तुलना में यह पांच से छह फीसदी बढ़ी हैं। बैंकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में आरबीआई की सबसे बड़ी चिंता यह है कि शिकायतों के निपटारे में भी बैंक देरी कर रहे हैं। इसके खिलाफ काफी शिकायतें आई हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें गलत तरीके से खाते से राशि का कट जाने और उसे दोबारा ग्राहक के खाते में पहुंचने में देरी होने की हैं। इसके अलावा ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे को लेकर बैंक कर्मचारियों का रवैया असहयोगात्मक रहने को भी ग्राहकों ने एक बड़ी समस्या बताया है।
सूत्रों के अनुसार इस संबंध में रिजर्व बैंक नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन के साथ मिलकर शिकायतों में हो रही देरी की पूरी समीक्षा कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंकों के लिए नए दिशानिर्देश भी जारी हो सकते हैं। इसके पहले इंडियन बैंक्स एसोसिएशन भी क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में बढ़ी धोखाधड़ी को लेकर आरबीआई के सामने एक प्रस्तुति दे चुका है, जिसमें उसने मल्टीपल पिन प्रणाली लागू करने की प्रमुख रूप से सिफारिश की है।