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एनपीए व लोन रीस्ट्रक्चरिंग पर आरबीआई सख्त

Tue, 30 Oct 2012 08:22 PM IST
मुंबई/एजेंसी
मुंबई/एजेंसी Updated Tue, 30 Oct 2012 08:22 PM IST
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RBI strict on NPA and loan restructuring

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) और ऋण पुनर्गठन (लोन रीस्ट्रक्चरिंग) पर लगाम लगाने के लिए ऋण पुनर्गठन के प्रावधान (रीस्ट्रक्चर्ड लोन पर प्रोविजनिंग) को दो प्रतिशत से बढ़ाकर 2.75 प्रतिशत कर दिया है।

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इससे बैंकों पर एनपीए घटाने और लोन के पुनर्गठन की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए दबाव बढ़ेगा। उसके अलावा आरबीआई ने कहा है कि मार्च 2012 तक लाइसेंस हासिल करने में असफल रहे ग्रामीण सहकारी बैंक परिचालन नहीं कर पाएंगे।
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रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए ऋण एवं मौद्रिक नीति की समीक्षा जारी करते हुये कहा कि एनपीए और पुनर्गठित ऋण में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
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उन्होंने कहा कि बैंकों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावी तरीके से नहीं हो रहा है। सितंबर और दिसंबर 2008 में इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बावजूद उस पर प्रभावी अमल नहीं हो पा रहा है। इसके मद्देनजर बैंकों को सलाह दी जा रही है कि वे ऋण, डेरिवेटिव्स और बगैर हेज वाले विदेशी मुद्रा ऋण के संबंध में दिशा निर्देश का कड़ाई से पालन करें। इस संबंध में दिसंबर 2012 अंत तक एक प्रभावी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से भी जारी किया जाएगा।

सुब्बाराव ने कहा कि नए शहरी सहकारी बैंकों के संबंध में गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर मिले सुझावों के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि इसके संबंध में गवर्नेंस व्यवस्था से जुडे़ मुद्दों का समाधान होने के बाद इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मार्च 2012 तक जो ग्रामीण सहकारी बैंक लाइसेंस हासिल करने में असफल रहे, उन्हें परिचालन की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि 31 राज्य सहकारी बैंकों में से एक और 371 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में से 42 बैंक लाइसेंस हासिल करने में असफल रहे हैं।


हालांकि नाबार्ड ने राज्य सहकारी बैंक और 16 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को लाइसेंस जारी करने की सिफारिश की थी। शेष 26 बैंकों ने निर्धारित पात्रता पूरी नहीं की है। सुब्बाराव ने कहा कि अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) मानदंडों को लेकर भी कुछ शिकायतें मिली हैं, जिसके मद्देनजर इस दिशा निर्देश की समीक्षा की जाएगी।

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