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सीडीआर पर बैंकों को करनी होगी ज्यादा प्रोविजनिंग
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Oct 2012 07:34 PM IST
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बढ़ते कॉरपोरेट कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग (सीडीआर) मामले को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के प्रोविजनिंग नियमों में सख्ती कर दी है। बैंकों को अब सीडीआर पर 2.75 फीसदी प्रोविजनिंग करनी पड़ेगी। जबकि पहले यह सीमा 2.0 फीसदी थी।
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आरबीआई के इस कदम से बैंकों के शुद्ध लाभ पर 3-4 फीसदी का असर पड़ सकता है। नए नियमों की घोषणा के देश के सभी प्रमुख बैंकों के शेयर कीमतों में मंगलवार को देखी गई। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2012 तक बैंकों के पास सीडीआर के 392 मामले आएं हैं। जबकि मार्च 2009 में इनकी संख्या 225 थी।
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सीडीआर के तहत चालू वित्त वर्ष में तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग पहुंचने की संभावना है। मार्च 2012 तक यह आंकड़ा 2,06,493 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। बढ़ते सीडीआर मामले को देखते हुए आरबीआई द्वारा प्रोविजिनिंग सीमा में बढ़ोतरी पर पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी केआर कामथ ने अमर उजाला को बताया कि प्रोविजनिंग में बढ़ोतरी की वजह से बैंकों के शुद्ध लाभ पर असर होगा।
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इसी तरह ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स के सीएमडी एसएल बंसल का भी मानना है कि ‘बैंकों को अब पहले की तुलना में ज्यादा प्रोविजनिंग करनी होगी, जिसकी वजह से उनके लाभ पर असर होगा’।
बैंकों को कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग करने पर एक हिस्सा अलग से प्रोविजनिंग के लिए रखना होता है। जिसका इस्तेमाल वह अपने लाभ के लिए नहीं कर सकते हैं। ऐसे में रिस्ट्रक्चरिंग ज्यादा करने से बैंकों के लाभ में कमी आती है। बैंक उस कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग करते है जिस कर्ज पर उनको भुगतान आदि की समस्या आने लगती है, साथ ही उस कर्ज की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) हो जाने की आशंका बढ़ जाती है।