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दस के नोट की जगह सिक्के चलाएगा रिजर्व बैंक
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 23 Nov 2012 09:20 PM IST
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रिजर्व बैंक दस रुपये के नोट को धीरे-धीरे प्रचलन से हटा कर उसकी जगह दस रुपये के सिक्के प्रचलित करने की योजना बना रहा है।
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इसकी वजह कागज के नोट का औसतन महज नौ से दस महीने तक ही प्रचलन में रह पाना है, जबकि सिक्के इससे कहीं लंबे समय तक प्रचलन में बने रहते हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी है। हालांकि रिजर्व बैंक की इस योजना का क्रियान्वयन राजकीय टकसालों से आवश्यक मात्रा में सिक्कों की आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
मीणा ने दस रुपये के नोट को छापने में लगने वाली लागत को उसके प्रचलन में बने रहने की अवधि के हिसाब से अधिक कहते हुए बताया कि दस रुपये के नोट की लागत 96 पैसे बैठती है, जबकि सिक्के की लागत 6.10 रुपये है।
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उन्होंने बताया नोटों, खासकर कम मूल्य के नोटों के प्रचलन की अवधि को बढ़ाने के प्रयासों के तहत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने पॉलिमर व प्लास्टिक से बने 10 रुपये के दस लाख नोटों को प्रायोगिक तौर पर प्रचलित करके देखने का फैसला किया है।
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एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि नोटों के मुद्रण के मामले में हमारा देश पूरी तरह आत्म निर्भर है। उन्होंने बताया कि देश में प्रचलन के लिए विभिन्न मूल्यों के 1,760 करोड़ नोटों की जरूरत होती है, जोकि नोट छापने वाली देश की चार प्रेसों में ही छाप लिए जाते हैं।