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बाजार की निगाहें टिकी रिजर्व बैंक पर

Sun, 16 Dec 2012 08:24 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sun, 16 Dec 2012 08:24 PM IST
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rbi monetary policy to dictate market trend

भारतीय रिजर्व बैंक को कर्ज एवं मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा के दौरान कठिन चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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नीतिगत दरों में कटौती की कारोबारी जगत की अपेक्षाओं और महंगाई नियंत्रण के उपायों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। रिजर्व बैंक मंगलवार को नीतिगत दरों की मध्य तिमाही मध्य समीक्षा करने वाला है।

इस दौरान उसे अपेक्षाकृत सुधरे हुए आर्थिक हालात के बीच यह फैसला करना है कि वह महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता देने की अपनी नीति पर चलना जारी रखेगा अथवा आर्थिक विकास को तेज करने के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता अपनाएगा।
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दरअसल गत दिनों दो मोर्चों पर आई सकारात्मक खबरों ने रेपो और रिवर्स रेपो दरों में हल्की कटौती की उम्मीद जगाई है। अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन में 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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इसके अलावा नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति के दस महीनों के न्यूनतम स्तर 7.24 प्रतिशत पर रहने से महंगाई के काबू में आने के भी संकेत मिल रहे हैं। मगर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर के बढ़कर 9.90 प्रतिशत पर पहुंचने से रिजर्व बैंक पर महंगाई नियंत्रण के उपाय आगे भी जारी रखने का दबाव पड़ सकता है।


हालांकि गत 30 अक्तूबर को पिछली समीक्षा के दौरान रिजर्व बैंक ने जब रेपो और रिवर्स रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया था तो उसे केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की खुलेआम नाराजगी का सामना करना पड़ा था।

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