सस्ते कर्ज का इंतजार हो सकता है लंबा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारी उम्मीदों के साथ आई मोदी सरकार के कार्यकाल में सस्ते कर्ज का इंतजार अभी लंबा खिंच सकता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार ऊंची मंहगाई दर को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक मंगलवार को पेश होने वाली मौद्रिक नीति में प्रमुख दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि आरबीआई नगदी की उपलब्धा बढ़ाने के कदम उठा सकता है, जिससे कि आने वाली मौद्रिक नीति में सस्ते कर्ज देने का रास्ता तैयार हो सके।
मंगलवार को आरबीआई पेश करेगा मौद्रिक नीति क्रिसिल के अर्थशास्त्री डी.के.जोशी ने अमर उजाला को बताया कि आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति में बदलाव की संभावना बहुत कम है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि अभी रिटेल महंगाई दर खास तौर से सब्जियों आदि के दाम ज्यादा है। इसके अलावा विकास दर में भी बहुत तेजी नहीं है। ऐसे में आरबीआई मंगलवार को मौद्रिक नीति में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
जोशी के अनुसार अच्छी बात यह कि सरकार राजकोषीय घाटे को 4.1 फीसदी तक लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में इस दिशा में कदम उठाना होगा। सरकार को विनिवेश प्रक्रिया को जल्द शुरू करना चाहिए। यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के इक्विटी प्रमुख अनूप भास्कर के अनुसार हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में ब्याज दरों में कमी करेगा।
बैंकर्स के अनुसार रिजर्व बैंक ओवरनाइट रेट को रेपो रेट के आसपास लाने के कदम मौद्रिक नीति में उठा सकता है। इस समय रेपो रेट 8.0 फीसदी के स्तर पर है। रिवर्स रेपो रेट 7.0 फीसदी पर है। इसी तरह नगद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 4.0 फीसदी पर है। वहीं थोक मूल्य सूचकांक इस समय 7.3 फीसदी के स्तर पर है। बैंकर्स को उम्मीद है कि नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक में कमी आने की संभावना है, जिससे आरबीआई के लिए अगली नीति में कर्ज सस्ता करने की राह आसान हो सकती है।