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नहीं घटीं ब्याज दरें, चिदंबरम नाखुश, बाजार को झटका
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Oct 2012 09:05 PM IST
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रिजर्व बैंक ने अपनी कर्ज एवं मौद्रिक नीति की मध्यावधि समीक्षा में ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की है, जिसपर वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने नाखुशी जाहिर की है। शेयर बाजारों को भी आरबीआई के इस रुख से झटका लगा। हालांकि, रिजर्व बैंक ने सीआरआर में चौथाई फीसदी की कटौती की है, जिससे बैंकों के हाथ में 17,500 करोड़ रुपये की नकदी आएगी।
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रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा पर निराशा जताते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि महंगाई से भी बड़ी चुनौती है आर्थिक विकास दर को बनाए रखना। अगर जरूरत पड़ी तो सरकार महज अपने स्तर पर प्रयास करते हुए इस ओर कदम बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि जितना महत्व महंगाई को दिया जा रहा है उतना ही आर्थिक विकास को भी दिया जाना चाहिए। आरबीआई ने मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया। जबकि, सीआरआर को 4.5 फीसदी से घटाकर 4.25 फीसदी कर दिया है।
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मौद्रिक नीति पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव ने महंगाई पर चिंता जताई। इसके साथ ही सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि हमें महंगाई को नियंत्रित करने के प्रमुख उद्देश्य से नहीं भटकना चाहिए। रिजर्व बैंक ने मार्च 2013 तक महंगाई दर के पूर्वानुमान को 7 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है।
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दूसरी ओर, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद में बैठा शेयर बाजार रिजर्व बैंक के इस रुख से खासा निराश हुआ। मौद्रिक नीति की घोषणा के साथ ही बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हो गया। इससे बीएसई का सेंसेक्स 205 अंक टूटकर 18,431 और एनएसई का निफ्टी 68 अंक गिरकर 5,598 पर बंद हुआ।
सीआरआर में कटौती से बैंकों पर होने वाले असर पर पंजाब नेशनल बैंक के सीएमडी केआर कामथ ने बताया कि सरकार के इस कदम से बैंकों के पूंजी लागत में कमी आएगी। साथ ही कर्ज रफ्तार बढ़ेगी, जिसका फायदा ग्राहकों को आने वाले दिनों में मिल सकता है।
मुद्रास्फीति की तरह ही विकास भी चुनौतीपूर्ण है। यदि विकास के लिए सरकार को अकेले ही आगे बढ़ना होगा तो हम अकेले ही बढ़ेंगे।-पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री