कर्ज वापस न करने वालो की अब खैर नहीं!

sachin yadavसचिन यादव Updated Fri, 22 Nov 2013 12:41 PM IST
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तेजी से डूबता कर्ज न सिर्फ बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को बढ़ा रहा है, बल्कि यह भारतीय रिजर्व बैंक की पेरशानी बढ़ाता जा रहा है।
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इसे देखते हुए रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वह अपनी कर्ज वसूली की प्रक्रिया को चुस्त-दुरुस्त करें। यहीं नहीं, कर्ज देने से पहले ग्राहक के कर्ज चुकाने की क्षमता की भी जांच-पड़ताल करें। इन कदमों के जरिए बैंक बढ़ती एनपीए पर लगाम कस सकेंगे।
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रिजर्व बैंक द्वारा जारी ‘ट्रेंड एंड प्रोगेस ऑफ बैंकिंग रिपोर्ट 2012-13’ में कहा गया है कि अधिसूचित बैंकों की सकल गैर निष्पादित संपत्तियां मार्च 2013 तक 3.6 फीसदी तक पहुंच गई हैं। जो कि वित्त वर्ष 2011-12 में 3.1 फीसदी था। इसी तरह बैंकों का शुद्ध एनपीए वित्त वर्ष 2012-13 में 1.3 फीसदी से बढ़कर 1.7 फीसदी हो गया है।

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रिजर्व बैंक के अनुसार मार्च 2013 तक बैंकों का सकल एनपीए 1.94 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के अनुसार बढ़ते एनपीए को देखते हुए बैंकों को रिकवरी प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है।

रिजर्व बैंक के अनुसार इसके तहत डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी का इस्तेमाल और बेहतर तरीके से होना चाहिए।
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