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आरबीआई ने पूरी नहीं की सस्ते कर्ज की आस
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
Updated Tue, 03 Feb 2015 08:13 PM IST
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उद्योग जगत, बैंकरों और अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों के विपरीत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मूल ब्याज दर (रेपो रेट) में कोई कटौती नहीं की है।
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इस साल की अपनी पहली अपनी द्वैमासिक मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई ने रेपो रेट को 7.75 फीसदी पर बरकरार रखा है। हालांकि वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में आधे फीसदी की कटौती करके बैंकों के लिए अपनी ओर से कर्ज सस्ता करने की एक गुंजाइश जरूर पैदा की है।
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7 फरवरी से प्रभावी होने वाली इस कटौती के बाद एसएलआर 21.5 फीसदी हो गई है। मौद्रिक एवं ऋण नीति की समीक्षा जारी करते हुए आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि हमने ब्याज दरों पर यथा स्थिति बनाए रखी है। हालांकि हमने अन्य मोर्चों पर कार्रवाई की है।
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उन्होंने कहा कि ब्याज दरों को यथावत इसलिए रखा गया है, क्योंकि पिछले एक महीने से महंगाई और औद्योगिक उत्पादन का कोई नया आंकड़ा सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि हम अधिक आर्थिक और राजकोषीय आंकड़ों और घटनाक्रम का इंतजार करेंगे। उसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोपो दर में कोई कमी न करके रिजर्व बैंक ने सीधे तौर पर कोई राहत तो नहीं दी है, पर एसएलआर में की गई कमी बैंकों के लिए कर्ज देने और इसकी ब्याज दर में कुछ कमी करने का एक परोक्ष विकल्प पेश किया है।
एसएलआर वह अनिवार्य राशि है, जिसे वाणिज्यिक बैंक नकदी, साने, बांड या अन्य प्रतिभूतियों के रूप में अपने पास रखते हैं। इसमें कमी से बैंकों के पास कर्ज देने पास अधिक धन सुलभ हो सकता है।
गौरतलब है कि आरबीआई ने इससे पहले 15 जनवरी को रेपो दर में चौथाई फीसदी की कटौती कर इसे 8 फीसदी से 7.75 फीसदी कर दिया था। उस समय उद्योग जगत ने इसे महज प्रतीकात्मक कटौती कहते हुए ब्याज दर में और कमी करने की आवश्यकता जताई थी, ताकि उन्हें सस्ता कर्ज मिल सके।
ऐसे में ताजा समीक्षा में रिवर्ज बैंक से रुख से उद्योग जगत को निराशा हुई है। साथ ही आम उपभोक्ताओं के लिए भी होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज की किस्तों (ईएमआई) में तत्काल कोई कमी होने की संभावना भी कमजोर पड़ी है।