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RBI ब्याज दरों को तय करने के तरीके में करेगा बदलाव!
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 24 Dec 2013 08:32 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैक (आरबीआई) अपनी मौद्रिक नीति में व्यापक बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत रिजर्व बैंक आगे से मौद्रिक नीति की समीक्षा थोक महंगाई दर के बजाय खुदरा महंगाई को फोकस में रखकर कर मौद्रिक कदम उठा सकता है।
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मौद्रिक नीति निर्धारण में बदलाव को लेकर आरबीआई की ओर से गठित विशेषज्ञों का पैनल इस महीने के अंत में एक रिपोर्ट पेश करेगा, जिसे मौद्रिक नीति में बदलाव का आधार बनाया जा सकता है। रघुराम राजन द्वारा आरबीआई के गवर्नर पदभार संभालने के वक्त मौद्रिक नीति की गहन समीक्षा करने के आदेश के तहत यह तैयारी की जा रही है।
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सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह सुझाव भी आ सकता है कि आगे से आरबीआई का मुख्य लक्ष्य कीमतों में स्थायित्व लाना हो, ताकि यह स्पष्ट संकेत दिया जा सके कि महंगाई को काबू करना उसका मुख्य लक्ष्य है। हालांकि इसके साथ ही उसके द्वारा आर्थिक विकास को भी पूरी अहमियत दिए जाने की संभावना भी रहेगी।
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पैनल की ओर से नीतिगत दरों के संबंध में अमेरिकी फेड रिजर्व में वोटिंग की व्यवस्था के तर्ज पर ही देश में भी ऐसी ही कोई व्यवस्था का सुझाव आ सकता है। हालांकि ऐसे किसी सुझाव पर अमल के लिए संसद द्वारा आरबीआई के कानून में संशोधन अनिवार्य होगा।
मौजूदा व्यवस्था के तहत नीतिगत दरों में बदलाव का पूरा अधिकार आरबीआई के गवर्नर के पास है। हालांकि ऐसा वह मौद्रिक नीति समिति की ओर से दी गई सलाह के आधार पर करता है। रिपोर्ट में आरबीआई की ओर से पूंजी तरलता प्रबंधन के संबंध में भी कुछ नए बदलावों की बात कही जा सकती है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत आरबीआई मौद्रिक नीति तय करते वक्त हमेशा बैंकिंग तंत्र में तरलता की कमी दूर करने के उपायों पर अपना ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन आगे पूंजी तरलता की अधिकता की स्थिति से निबटने की व्यवस्था के लिए भी कुछ उपाय किए जाने की संभावनाओं का जिक्र रिपोर्ट में हो सकता है।