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रेपो रेट में कमी लेकिन EMI पर तुरंत नहीं मिलेगी राहत
मुंबई/एजेंसी
Updated Fri, 03 May 2013 10:53 PM IST
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रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को रेपो रेट में कमी करने से अगर आप ईएमआई में राहत पाने की उम्मीद कर रहे हैं, तो उसके लिए अभी इंतजार करना होगा।
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देश के प्रमुख बैंक नकदी की किल्लत और ऊंची पूंजी लागत को देखते हुए कर्ज सस्ता करने में कोई जल्दीबाजी नहीं उठाने चाहते हैं।
बैंकर्स के अनुसार मौजूदा स्थिति में जब मांग कम है और जमाएं नहीं आ रही हैं, तो बैंक जमा दरों में कमी कर ग्राहकों को दूर नहीं करना चाहते हैं।
हालांकि बैंक यह भी मान रहे हैं कि रिजर्व बैंक ग्रोथ को बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कमी करने में संकेत दे चुका है। ऐसे में इसका लाभ ग्राहकों भी आने वाले दिनों में मिलेगा।
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देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और सबसे बड़े निजी बैंक आईसीआईसीआई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फिलहाल वह लोन की ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करने जा रहे हैं।
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एसबीआई के अध्यक्ष प्रतीप चौधरी ने कहा कि फंड की लागत लगातार ऊंची बनी हुई है, जिससे बैंकों की सेहत पर असर हो रहा है और ऐसे में बैंकों की ब्याज दर कम करने की क्षमता प्रभावित होती है।
पंजाब नेशनल बैंक के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक केआर कामथ ने बताया कि रिजर्व बैंक का संकेत स्पष्ट है कि ग्रोथ कम हो रही है। ऐसे में इसे बढ़ाने के लिए कर्ज सस्ता करना होगा।
आज के कदम से बैंकों की पूंजी लागत में कमी सीधे नहीं आएगी, जिसे देखते हुए कर्ज सस्ता करने के कदम के लिए इंतजार करना होगा। बैंक मांग बढ़ाने के लिए बेस रेट न कम कर कुछ खास सेगमेंट के कर्ज आने वाले दिनों में सस्ता कर सकते हैं।
आईडीबीआई बैंक के सीएफओ पी. सीताराम के अनुसार मौजूदा समय में नकदी की किल्लत है। ऐसे में बैंक जमा दरों में कमी कर ग्राहकों को दूर नही करेंगे। जिसे देखते हुए कर्ज की दरों में कमी आने के लिए इंतजार करना होगा।
बैंक ऑफ इंडिया के सीएमडी वीआर अय्यर के अनुसार आज की मौद्रिक नीति से स्पष्ट है कि ग्रोथ पर दबाव है। साथ ही मौजूदा ग्रोथ और महंगाई का समीकरण रिजर्व बैंक के लिए ज्यादा कदम उठाने को सीमित करता है।
आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर के अनुसार रेपो रेट में कमी से साफ है कि आरबीआई कर्ज की रफ्तार बढ़ाना चाहता है। पर महंगाई और दूसरे कारक अभी चुनौती बने हुए हैं।
ऋण एवं मौद्रिक नीति की मुख्य बातें:
-रेपो दर 0.25 फीसदी घटकर 7.25 फीसदी।
-रिवर्स रेपो दर 0.25 फीसदी घटकर 6.25 फीसदी।
-सीआरआर 4 फीसदी पर बरकरार।
-एसएलआर 23.0 फीसदी पर स्थिर।
-महंगाई दर 5.5 फीसदी पर रहने का अनुमान।
-आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रहने का अनुमान।
-लीड बैंक योजना बडे़ शहरों में भी लागू करने का निर्णय।
-चालू खाते के घाटे को अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया।
-एमएसएमई के लिए कर्ज की सीमा 2 करोड़ से बढ़ा कर 5 करोड़ रुपये।
-बैंकों से होम ब्रांच व नॉन होम ब्रांच ग्राहकों में भेदभाव बंद करने को कहा।
-बैंकों से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को बेहतर ढंग से लागू करने को कहा।
-कोबरापोस्ट खुलासे के बाद बैंकों द्वारा नियमों के मानने पर और अधिक चौकसी की जरूरत।
-17 जून को जारी होगी मध्य तिमाही मौद्रिक समीक्षा।