फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   rbi cuts interest rate by 0.25 pc

ब्याज दरों में कटौती, कम हो सकती है EMI

Fri, 03 May 2013 07:11 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 03 May 2013 07:11 PM IST
विज्ञापन
rbi cuts interest rate by 0.25 pc

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को रेपो और रिवर्स रेपो दरों में एक चौथाई प्रतिशत की कमी करने का ऐलान किया। संभावना जताई जा रही है कि इससे आवास, कार और व्यक्तिगत कर्ज के सस्ते होंगे।

विज्ञापन


रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि हांलाकि आगे नीतिगत दरो में कमी की संभावना कम दिख रही है। इस वर्ष जनवरी से अब तक तीसरी बार रेपो और रिवर्स रेपो दरो में कमी की गई है।
विज्ञापन


इस कटौती के बाद के बाद अब रेपो दर 7.5 प्रतिशत से एक चौथाई प्रतिशत कम होकर 7.25 प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर 6.5 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत पर और बैंक दर 8.50 प्रतिशत से कम होकर 8.25 प्रतिशत हो गयी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हांलाकि केंद्रीय बैंक ने नकद आरक्षित आनुपात में कोई कमी नहीं की है और यह चार प्रतिशत पर यथावत है। रेपो दरें अब मई 2011 के बाद के न्यूनतम स्तर पर आ गई है।

चालू खाता घाटा ऊंचे स्तर पर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक समीक्षा में घरेलू अर्थव्यवस्था के विकास के लिए चालू खाते के घाटे (सीएडी) को सबसे बड़ा जोखिम बताया है। साथ ही आरबीआई ने नकदी के संकट, घटते निवेश और ऊंची महंगाई दर को काबू में लाने पर भी जोर दिया है।

आरबीआई के गर्वनर डी सुब्बाराव ने कहा कि चालू खाता घाटा ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। यह जीडीपी का 2.5 फीसदी तक होना चाहिए, लेकिन फिलहाल यह 5.2 फीसदी के स्तर पर बना हुआ हुआ है।

ऐसे में पूंजी के आंतरिक स्रोतों पर दबाव पड़ता है और बाजार तरलता के संकट की ओर बढ़ता है। नकदी के संकट को रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था का दूसरा और घटते निवेश को तीसरा जोखिम करार दिया।

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने ऊंची महंगाई दर को भी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम वाला तत्व बताया है और कहा कि आपूर्ति बढ़ाकर इसपर काबू पाने का प्रयास करना चाहिए।

'चौथाई फीसदी की कटौती हालात के अनुरूप
'
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने रेपो दर में 0.25 फीसदी कटौती को देश के मौजूदा आर्थिक हालात में एक नपा-तुला कदम बताया है।


उन्होंने कहा कि थोक मूल्य आधारित महंगाई दर में गिरावट के संकेत हैं, जबकि खुदरा महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, चालू खाते का घाटा भी ज्यादा है।

ऐसे में मौजूदा स्थिति में सतर्क रहते हुए कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि अर्थ तंत्र में कई प्रतिकूल कारक अब भी काम कर रहे हैं।

रिजर्व बैंक ने हालात को देखते हुए माकूल कदम उठाया है। आने वाले समय में आरबीआई क्या करेगा, यह काफी कुछ महंगाई की चाल पर निर्भर करेगा।

ऋण एवं मौद्रिक नीति की मुख्य बातें:
-रेपो दर 0.25 फीसदी घटकर 7.25 फीसदी।
-रिवर्स रेपो दर 0.25 फीसदी घटकर 6.25 फीसदी।
-सीआरआर 4 फीसदी पर बरकरार।
-एसएलआर 23.0 फीसदी पर स्थिर।
-महंगाई दर 5.5 फीसदी पर रहने का अनुमान।
-आर्थिक विकास दर 5.7 फीसदी रहने का अनुमान।
-लीड बैंक योजना बडे़ शहरों में भी लागू करने का निर्णय।
-चालू खाते के घाटे को अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया।
-एमएसएमई के लिए कर्ज की सीमा 2 करोड़ से बढ़ा कर 5 करोड़ रुपये।
-बैंकों से होम ब्रांच व नॉन होम ब्रांच ग्राहकों में भेदभाव बंद करने को कहा।
-बैंकों से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को बेहतर ढंग से लागू करने को कहा।
-कोबरापोस्ट खुलासे के बाद बैंकों द्वारा नियमों के मानने पर और अधिक चौकसी की जरूरत।
-17 जून को जारी होगी मध्य तिमाही मौद्रिक समीक्षा।

रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कटौती का हम स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे आगे बैंकों के ब्याज दर में कटौती का रास्ता खुलेगा। हालांकि रियल एस्टेट सेक्टर को और भी अधिक कटौती की उम्मीद थी। आशा करते हैं कि जैसै-जैसे महंगाई दर में गिरावट आएगी आने वाले समय में रिजर्व बैंक ब्याज दरें घटाएगा।--अभय कुमार, सीएमडी, गृह प्रवेश बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed