छोटी दुकानों में मिलेगी अब बैंकिंग सेवाएं, जानिए कैसे?
हर घर में बैंकिंग सेवा पहुंचाने के मोदी सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में गली-गली तक पहुंच रखने वाले छोटे दुकानदारों की अहम भूमिका तय करने की तैयारी है।
भारतीय रिजर्व बैंक इसके तहत पेमेंट बैंक की गाइडलाइन में खास तौर से किराना दुकान, दवा की दुकान, पीसीओ आदि का कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को बिजनेस कॉरस्पॉडेंट की भूमिका दे सकता है।
मोदी सरकार बैंकिंग सेवाओं की पहुंच न रखने वाले 7.5 करोड़ परिवारों तक सेवाएं पहुंचाने की तैयारी में है।
रिजर्व बैंक कर सकता है बदलाव
सूत्रों के अनुसार सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक पेमेंट बैंक के लिए फाइनल गाइडलाइन जारी करने में न्यूनतम चुकता पूंजी की सीमा आदि में बदलाव कर सकता है।
ड्रॉफ्ट गाइडलाइन में रिजर्व बैंक ने पेमेंट बैंक के लिए 100 करोड़ रुपये की न्यूनतम चुकता पूंजी का प्रस्ताव दिया। इस संबंध में इंडस्ट्री के तरफ से जो सुझाव गया है, उसमें दो अहम मुद्दों में बदलाव करने की बात कही गई है।
रिजर्व बैंक ने मांगे हैं सुझाव
इंडस्ट्री ने रिजर्व बैंक से कहा है कि पेमेंट बैंक में केवल साधारण बचत खाता और चालू खाता के तहत जमाएं लेने का अधिकार होगा, ऐसे में 100 करोड़ रुपये की सीमा को घटाकर 50 करोड़ करनी चाहिए। इंडस्ट्री के अनुसार नचिकेत मोर समिति की सिफारिश भी 50 करोड़ रुपये की ही बात की गई थी। इसी तरह देश में प्री-पेमेंट का कारोबार करने वाली कंपनियों ने अपने फ्रेंचाइजी के रुप में छोटे दुकानदारों को जोड़ रखा है।
ऐसे में अगर इन्हें बिजनेस कॉरस्पॉडेंट बनाने की अनुमित मिलती है, तो एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नए बैंक को मिल सकता है। रिजर्व बैंक ने इस संबंध में 28 अगस्त तक सुझाव मांगे हैं। जिसके बाद वह पेमेंट और छोटे बैंक के लिए अंतिम दिशा निर्देश जारी करेगा।
बैंकिंग सेवाओं का बढ़ेगा दायरा
इस संबंध में इट्स कैश कार्ड लिमिटेड के मार्केटिंग प्रमुख मुदित भटनागर ने अमर उजाला को बताया कि कंपनी पेमेंट बैंक के दिशा निर्देश का इंतजार कर रही है। जिसके बाद वह लाइसेंस के आवेदन पर विचार करेगी। भटनागर के अनुसार कंपनी के करीब 5 लाख ग्राहक हैं, जो प्री-पेड कार्ड की सेवाएं ले रहे हैं। जिसमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो कि बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच नहीं रखते हैं।