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बुरे दिनों की धुंध छंटी, नजरों में चढ़ी भारतीय अर्थव्यवस्था
एजेंसी
Updated Thu, 11 Sep 2014 08:47 PM IST
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बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बीओएफए-एमएल) का मानना है कि भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर बुरा दौरा गुजर चुका है और उम्मीद है कि रेटिंग एजेंसियां जल्द ही भारत के बारे में अपने आउटलुक में सुधार करेंगी।
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बीओएफए-एमएल ने एक रिसर्च नोट में कहा है कि पिछली रात को मूडीज ने ब्राजील के आउटलुक को घटाया और प्रमुख उभरते बाजारों का आउटलुक घट रहा है। लेकिन हमें उम्मीद है कि रेटिंग एजेंसियां भारत के लिए आउटलुक में सुधार करेंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए आउटलुक में सुधार की स्थिति पैदा करने वाले तीन कारण हैं।
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ग्रोथ अपने निचले स्तर से बाहर आ चुकी है, महंगाई का दबाव कम हो रहा है और दोहरे घाटे का जोखिम सही साबित नहीं हुआ है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन रुपये को 58-62 रुपये प्रति डॉलर के बीच स्थिर रखने के लिए विदेश मुद्रा भंडार को मजबूत कर रहे हैं।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की संभावित ग्रोथ रेट 7.5 फीसदी है और भारत 2019 तक चीन के बाद दूसरे सबसे बड़े उभरते बाजार के तौर पर सामने आ सकता है। बीओएफए-एमएल के मुताबिक हमारा विश्वास इस बात से भी मजबूत होता है कि ग्रोथ में सुस्ती घरेलू वजहों के बजाए प्रमुख तौर पर वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियां कम होने के वजह से थी।
अगर मोदी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाती है तो ग्रोथ 2018 तक वापस 7.5 फीसदी के स्तर तक पहुंचनी चाहिए। बीओएफए ने चार कारकों को रेखांकित किया है, जो 2018 तक भारत की ग्रोथ को वापस 7.5 फीसदी के स्तर पर वापस लाने में मददगार होंगे।
इन कारकों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रिकवरी, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने, रुपया 60 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर रहने और सरकार द्वारा सुधारों की गतिविधियों को तेज करना शामिल है। महंगाई पर रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्थानीय कारकों की वजह से बढ़ने के बजाए आयातित रही है।
हमें उम्मीद है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आरबीआई के अनुमान के अनुरूप 2016 तक घट कर 6 फीसदी के स्तर पर आ जाएगी। ब्याज दरों पर रिपोर्ट के बारे में कहा गया है कि हमारा मानना है कि गवर्नर रघुराम राजन विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में आरबीआई तब भी ब्याज दरों में कटौती कर सकता है अगर फेडरल बैंक सितंबर 2015 से ब्याज दरें बढ़ाता है।