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निवेश बढ़ाने के लिए दरों में कमी जरूरी
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Feb 2013 12:13 AM IST
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खराब वैश्विक स्थितियों के साथ घरेलू स्तर पर तमाम उतार-चढ़ावों से जूझ रही अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात निराशाजनक हो गए हैं। निर्यात की सुस्त रफ्तार और कमजोर निवेश से स्थिति और चिंताजनक हो गई है। घरेलू कंपनियों का कहना है कि मौजूदा हालात में कारोबार विस्तार करना मुमकिन नहीं है। निवेश आकर्षित करने के लिए ब्याज दरों को नीचे लाना होगा। देश की अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात पर उद्योग संगठन फिक्की की ओर से कराए गए सर्वे में यह बातें सामने आई हैं।
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सर्वे रिपोर्ट में 77 फीसदी उद्यमियों ने माना कि कारोबारी भरोसा वास्तव में बिगड़ गया है। मौजूदा हालात देश में कारोबार का विस्तार करने के माकूल नहीं हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 90 फीसदी कंपनियों का कहना है कि निवेश की रफ्तार बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कटौती बहुत जरूरी है।
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सर्वे में हासिल तमाम बिंदुओं को फिक्की की चेयरमैन नैना लाल किदवई ने सामने रखी। सर्वे में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि भारतीय कंपनियों को देश के बाहर निवेश करना अधिक सहज लग रहा है। सर्वे में शामिल 62 फीसदी कंपनियों का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था के मुकाबले बाहरी देशों में कारोबारी सेंटीमेंट बेहतर है।
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उद्योगों को राहत भरे फैसलों का इंतजार
आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए उद्योग जगत को सरकार की ओर से अभी और राहत भरे फैसलों का इंतजार है। उद्योग संगठन फिक्की ने कहा है कि आगामी वित्तीय वर्ष में मैन्यूफैक्चरिंग विकास दर बढ़ाने और घरेलू व विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को निवेश उन्मुख बजट तैयार करने की जरूरत है।
आम बजट 2013-14 से उम्मीदों पर चर्चा करते हुए फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा कि सरकार को उत्पाद व सीमा शुल्क में कटौती के साथ प्रत्यक्ष कर संहिता को जल्द लागू करना चाहिए।