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'आरबीआई मई में घटा सकता है ब्याज दरें'
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Tue, 16 Apr 2013 11:02 PM IST
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प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी 3 मई को अपनी मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है।
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हालांकि, फर्म ने साफ किया है कि दरों में कटौती की संभावना 80 फीसदी है लेकिन इसे भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है।
नोमुरा ने अपने एक रिसर्च नोट में कहा है कि विकास दर की धीमी रफ्तार और थोक मूल्य आधारित महंगाई दर में गिरावट को देखते हुए हमारा मानना है कि रिजर्व बैंक दरों में कटौती कर सकता है लेकिन यह निश्चित नहीं है।
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इस बात की संभावना 80 फीसदी है कि रिजर्व बैंक 3 मई को अपनी मौद्रिक एवं नीतिगत समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती करेगा।
सब्जियों की कीमतों के नीचे आने से महंगाई दर मार्च में तेजी से गिरकर तीन साल के निचले स्तर 5.96 फीसदी पर आ गई।
जबकि, प्रमुख महंगाई दर नरम पड़कर 3.5 फीसदी और खाद्य महंगाई दर भी घटकर 8.2 फीसदी पर रही। इससे रिजर्व बैंक दरों में कटौती करने पर विचार करने कर सकता है।
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इसके अलावा, हाल ही में सोना सहित अन्य कमोडिटी की कीमतों में तगड़ी गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है।
इससे थोकमूल्य आधारित महंगाई दर पर नियंत्रण में मदद मिलेगी और आने वाले महीने में तेल एवं सोने के आयात खर्च में भी कमी आएगी।
हालांकि, नोमुरा ने कहा कि कमोडिटी की कम कीमतें आधारभूत आर्थिक सुधारों की जगह नहीं ले सकती। भारत में खाद्य महंगाई दर और आपूर्ति की कमी बुनियादी परेशानियों के चलते है, जिसे ब्याज दरों में कमी कर दूर नहीं किया जा सकता है।
हमारा मानना है कि थोक मूल्य आधारित महंगाई दर के आधार पर मौद्रिक नीति के फैसले करना तर्कसंगत नहीं होगा। सरकार का कर राजस्व निराशाजनक रह सकता है।
वहीं, यदि सरकार आगे होने वाले चुनावों पर अत्यधिक खर्च करती है, तो असंतुलन एक बार फिर बुरी तरह बिगड़ जाएगा।