फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   rapid pace of development

फिर तेज होगी विकास की रफ्तार

Sat, 15 Dec 2012 11:15 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 15 Dec 2012 11:15 PM IST
विज्ञापन
rapid pace of development
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अर्थव्यवस्था की तेजी फिर से लौटने का भरोसा है। उनका कहना है कि हाल में लिए गए फैसले अर्थव्यवस्था को सुधारने की दिशा में शुरुआत भर हैं। आने वाले दिनों में सरकार कुछ और कड़े कदम उठा सकती है। प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के रास्ते में अत्यधिक निराशावाद को बड़ी बाधा करार देते हुए विपक्ष की विचारधारा से देश को आगाह किया है।
विज्ञापन


सरकार की आर्थिक नीतियों का लगातार विरोध कर रही भाजपा और वाम दलों पर निशाना साधते हुए मनमोहन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए हमें राजनीतिक तौर पर कई कठिन फैसले लेने पड़े हैं। जो लोग रिटेल में एफडीआई जैसे फैसलों का विरोध कर रहे हैं वे दुनिया की हकीकत से अनजान हैं या फिर पुरानी पड़ चुकी विचारधारा से बंधे हुए हैं। प्रधानमंत्री शनिवार को औद्योगिक संगठन फिक्की की 85वीं सालाना आम सभा को संबोधित कर रहे थे।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को फिर से 8-9 फीसदी की ऊंची विकास दर के रास्ते पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है। आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम विनिवेश प्रक्रिया में तेजी लाएंगे। सरकार बैंकिंग कानूनों में बदलाव और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करना चाहती है। इनके अलावा डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) और गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के मामले भी प्राथमिकता में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम

प्रधानमंत्री ने सब्सिडी के बढ़ते बोझ और राजकोषीय घाटे पर चिंता जाहिर करते हुए आने वाले दिनों में ईंधन के दाम बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। उनका कहना है कि बिजली और पेट्रोलियम पदार्थों के कम दाम सरकार के संसाधनों को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर जितना खर्च करती है, उससे ज्यादा तेल सब्सिडी का खर्च है। गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए हमें इस मसले को हल करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधार के जरिए नकद भुगतान से भ्रष्टाचार और सब्सिडी के दुरुपयोग को कम करने में मदद मिलेगी जबकि सरकारी फायदे सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed