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अधिकांश इलाकों से सूखे का खतरा टला

Fri, 05 Sep 2014 09:17 PM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली Updated Fri, 05 Sep 2014 09:17 PM IST
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rains bring relief from drought but farmers waiting for govt. support

इस सप्ताह हुई बारिश से देश के अधिकांश इलाकों में सूखे का खतरा कम हो गया है। लेकिन खरीफ बुआई की शुरुआत में कमजोर रहे मानसून ने किसानों की लागात बढ़ा दी है।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में इस मानसून सीजन के दौरान अभी तक सामान्य से 54-60 फीसदीकम बारिश हुई है। जिसके चलते इन क्षेत्रों में  सिंचाई की लागत बढ़ गई है। लेकिन अभी तक सूखा राहत योजना के तहत किसानों तक सस्ता डीजल नहीं पहुंचा है।
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मौसम विभाग के मुताबिक, अगले सप्ताह तक उत्तर भारत में मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। खरीफ बुआई के आखिरी चरण में हुई बारिश धान, गन्ना, सोयाबीन और कपास के लिए फायदेमंद है।
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पिछले दो सप्ताह के दौरान मध्य और उत्तर भारत में हुई बारिश से देश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से सिर्फ 13 फीसदी रह गया है। जबकि जुलाई के मध्य तक सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश थी।

पिछले दो सप्ताह के दौरान सामान्य से 22-24 फीसदी ज्यादा बारिश होने से देश पर सूखे का खतरा काफी हद तक टल गया है। हालांकि, इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन बुआई सीजन की शुरुआत में सूखे ने किसानों का खर्च बढ़ा दिया है।

हरियाणा और राजस्थान की स्थिति का जायजा लेने गए कृषि आयुक्त जेएस संधू ने बताया हाल की बारिश खरीफ की फसलों के लिए काफी फायदेमंद है। अभी तक फसलें बीमारियों और कीटों के प्रकोप से मुक्त हैं, इसलिए अच्छे उत्पादन की उम्मीद की जा रही है। अभी तक सिर्फ हरियाणा सरकार ने राज्य को सूखा घोषित कर केंद्र से मदद मांगी है। केंद्र ने सूखा राहत योजना के तहत राज्यों को सस्ता डीजल, सूखे का सामना करने में सक्षम बीज आदि मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

खरीफ की बुआई गत वर्ष से कम
कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस साल पांच सितंबर तक देश के कुल 987 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुआई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1021 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुआई हो चुकी थी।


हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी में बारिश की अत्यधिक कमी के बावजूद धान की बुआई का आंकड़ा पिछले साल के 364 लाख हेक्टेअर के मुकाबले इस साल 360 लाख हेक्टेअर तक पहुंच चुका है।

सबसे ज्यादा झटका तिलहन की बुआई को लगा है। अभी तक 173 लाख हेक्टेअर क्षेत्र में खरीफ की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 189 लाख हेक्टेअर था।

दलहन, गन्ना और मोटे अनाजों की बुआई का क्षेत्र भी घटा है। सिर्फ कपास की बुआई पिछले साल के ११३ लाख हेक्टेअर से बढ़कर इस साल १२४ लाख हेक्टेअर रही है।

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