{"_id":"2ee803bc-7fc5-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"railway-projects-in-himachal-are-pending-due-to-lack-of-funds","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार पैसा दे तो हिमाचल में पहाड़ चढ़े रेल","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
सरकार पैसा दे तो हिमाचल में पहाड़ चढ़े रेल
शिमला/ब्यूरो
Updated Tue, 26 Feb 2013 09:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलमंत्रालय की जिम्मेदारी आम तौर पर बिहार या बंगाल के हिस्से में रही है। आज पहला मौका होगा, जब हिमाचल के पड़ोसी मंत्री पवन कुमार बंसल रेल बजट पेश करेंगे।
विज्ञापन
इसमें हिमाचल के लिए क्या होगा? इस पर सबकी नजर है। राज्य को उम्मीद है कि रेल मंत्री राज्य की लंबित चार अहम रेल लाइनों को हरी झंडी दिखाएंगे। नई रेल लाइनों के लिए धन पर उम्मीद टिकी है।
विज्ञापन
आजादी के बाद के 65 वर्षों में हिमाचल में रेल की पटरी केवल 40 किलोमीटर ही आगे बढ़ पाई है। यह पटरी भी इलेक्ट्रिफाइड नहीं है।
हालात यह हैं कि 86 किमी नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन 40 साल में 32 किमी बन पाई। कालका-परवाणू लाइन 32 साल से पेंडिंग है। 63 किमी लंबी भानुपल्ली-बिलासपुर लाइन के लिए फंडिंग फार्मूला विवादित है।
विज्ञापन
रेल मंत्रालय 1200 करोड़ लागत का 25 फीसदी ही देने को तैयार है। राज्य सरकार को इस बार भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी, नंगल-तलवाड़ा, कालका-शिमला से बद्दी को जोड़ने और चंडीगढ़ की प्रस्तावित मेट्रो से चंडीगढ़ को जोड़ने के लिए कोई फैसला होने की उम्मीद है।
हिमाचल में रेल विभाग वित्त महकमा खुद देख रहा है। प्रधान सचिव वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी कहते हैं कि रेल मंत्रालय कहता है कि उनके पास नए प्रोजेक्टों के लिए धन नहीं है, इसलिए भारत सरकार से पैसा लाओ।
भारत सरकार केवल उन्हीं प्रोजेक्टों को धन देती है, जो राष्ट्रीय महत्व की कैटेगिरी में आते हैं। इसलिए राज्य सरकार अपनी रेल लाइनों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिलाने की मांग कर रही है।
जब तक ये नहीं होता, हजारों करोड़ की रेल लाइन के लिए हिमाचल अपने हिस्से का 25 फीसदी भी नहीं दे सकता। इस बार पैरवी अच्छी की है। देखते हैं क्या होता है?
हर साल वादों से आगे नहीं बढ़ती रेल
पिछले साल के रेल बजट में बद्दी-कालका, बिलासपुर-लेह वाया मनाली, घनौली-बद्दी, घनौली-देहरादून वाया कालाअंब-पांवटा साहिब रेल लाइनों के प्रस्ताव योजना आयोग के मूल्यांकन को भेजा था।
इस मूल्यांकन का क्या हुआ? राज्य सरकार के पास कोई रिपोर्ट नहीं है। 2011 में सामरिक महत्व की मनाली-लेह रेल लाइन 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए मंत्रालय ने भेजी थी, लेकिन इससे आगे भी बात नहीं बढ़ी।