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चुनावी ट्रैक पर दौड़ेगी यूपीए की रेल

Tue, 26 Feb 2013 09:47 AM IST
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
नई दिल्ली/बृजेश सिंह Updated Tue, 26 Feb 2013 09:47 AM IST
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railway budget today, upa train will run on election track

रेल बजट में अगले लोकसभा चुनाव की सियासी पटरी पर कांग्रेस की उम्मीदों की रेल को सरपट दौड़ाने की तैयारी रेलमंत्री पवन बंसल ने पूरी कर ली है। इसलिए रेलवे के आर्थिक संकट के बावजूद रेल किराए में सीधे बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। मगर सरचार्ज और सुविधाओं के नाम पर यात्रियों की जेब पर पिछले दरवाजे से कुछ बोझ डाला जा सकता है। इसी तरह मालभाड़े में भी मामूली वृद्धि की गुंजाइश को नकारा नहीं जा रहा।

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जनता को लुभाने के लिए लंबी दूरी की कुछ आधुनिक ईएमयू ट्रेनों समेत दर्जनों नई ट्रेनों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए लंबी दूरी की ट्रेनों में एक विशेष कोच लगाने की घोषणाएं भी संभव हैं। इसमें दिल्ली-मुंबई के बीच तीसरी राजधानी ट्रेन चलाने का ऐलान भी हो सकता है। तो बेहतर खानपान और साफ सफाई के साथ वर्ल्ड क्लास स्टेशन से लेकर बड़े स्टेशनों पर फाइव स्टार लाउंज का सपना दिखाने की तैयारी भी है।
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टिकटों की मारामारी रोकने के लिए ई-टिकटिंग की रोजाना क्षमता बढ़ाने के साथ दलालों का गोरखधंधा बंद करने के लिए बंसल के पिटारे में कुछ ऐलान तय हैं। इतना ही नहीं, 17 साल बाद रेल बजट पेश कर रहे कांग्रेसी रेलमंत्री बंसल के बजट में उत्तरी राज्यों और उत्तर प्रदेश में सोनिया-राहुल गांधी की सियासत के हिसाब से कुछ चुनावी सौगात तय मानी जा रही हैं। इसमें रेलवे आधारित नए प्रोजेक्ट लगाने का ऐलान भी होगा।
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रेलवे की आर्थिक बदहाली और सियासत को साधने की दोहरी चुनौती के बीच लोकसभा में मंगलवार को पवन बंसल यूपीए की उम्मीदों की रेल दौड़ाएंगे। उन्हें रेलवे की आर्थिक सेहत को सुधारने के साथ ही 2014 के आम चुनाव में अपनी पार्टी को भी उबारने के उपाय करना है। रेलवे की लंबित योजनाओं को पूरा करने तथा चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए भी रेलवे को ज्यादा बजट चाहिए।

पिछले साल केंद्र से 24000 करोड़ मिले थे, इस साल 26 से 30 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।जनवरी में ही रेलवे किराया बढ़ा चुका है। इससे 6600 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होने की उम्मीद थी लेकिन जनवरी में ही डीजल के थोक मूल्य में 10.80 रुपये लीटर की वृद्धि हो जाने से रेलवे को अब फ्यूल मद में 3300 करोड़ अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

इस खर्च की भरपाई के लिए रेलवे टिकटों पर अधिभार लगा सकता है। बजट में रेल टैरिफ अथारिटी की स्थापना पर भी घोषणा की जा सकती है। रेलवे के कुछ कार्यों को मनरेगा के तहत लाने का ऐलान भी बजट में किया जा सकता है। बजट में टिकट रिजर्वेशन को आधार कार्ड से जोड़ने, स्टेशनों व ट्रेन में यूज एंड पे के आधार पर टायलेट सुविधा तथा मुंबई के तिलक टर्मिनल की तर्ज पर देश के कुछ अन्य बड़े स्टेशनों को सुपर आदर्श स्टेशन बनाने की घोषणा भी किए जाने की उम्मीद है। रेलवे की खानपान व्यवस्था फिर से आईआरसीटीसी को लौटाने की भी बजट में उम्मीद है।


चुनावी होंगी नई योजनाएं
:- रेल रूटों पर दबाव के बावजूद बड़ी संख्या में नई ट्रेनों के चलाने की घोषणा हो सकती है।
:- यूपी, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली तथा दक्षिण के कुछ राज्यों को मिल सकता है नई ट्रेनों का तोहफा।
:- लंबी दूरी के रूटों पर आधुनिक ईएमयू ट्रेन सेट्स चलाने की घोषणा की जा सकती है।
:- सियासी हितों को देखते हुए राय बरेली और अमेठी में रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की स्थापना की घोषणा संभव।
:- लोगों को रोजगार देने के मकसद से कोई रेल उत्पादन इकाई भी लगाने की घोषणा संभव।

ये मिल सकती हैं सुविधाएं
मध्यम व शहरी वर्ग को ध्यान में रखते हुए प्रमुख स्टेशनों पर खान पान की व्यवस्था को दो वर्गों में बांटने, आधुनिक प्रतीक्षालय, बैट्री चालित ट्रालियां, एक्सीलेटर आदि  सुविधाओं की भी घोषणा संभव।

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