रेल किराए में बढ़ोतरी कुछ घंटों में वापस क्यों हुई?
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आम चुनाव खत्म होते ही रेलवे बोर्ड ने रेल किराये व माल भाड़े में वृद्धि की घोषणा को कुछ घंटों में वापस ले लिया। रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे के आदेश पर किराये व माल भाड़े में वृद्धि के फैसले पर अमल पर रोक दिया गया। रेलवे ने 20 मई से रेलवे के सभी श्रेणी के किरायों में 14.5 फीसदी तथा माल भाड़े में 6.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी।
रेलवे की आय में गिरावट
सूत्रों का दावा है कि प्रस्तावित बजट की तुलना में रेलवे की आय में गिरावट तथा फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेंट (एफएसी) के तहत किराये व भाड़े में वृद्धि का यह फैसला काफी पहले हो चुका था किंतु चुनाव आचार संहिता के कारण अभी तक इसकी घोषणा नहीं की गई थी।
चुनाव परिणाम आते ही रेलवे बोर्ड ने किराया बढ़ाने संबंधी आदेश अपनी वेबसाइट पर डाल दिया। जैसे ही मीडिया में रेल किराया बढ़ने की खबर आई रेल मंत्री मल्लिकार्जुन ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को इस आदेश पर अमल अगली सरकार के गठन तक रोकने का निर्देश दिया।
गुस्से का शिकार न बने कांगेस?
सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस नहीं चाहती है कि महंगाई के लिए पहले से आम लोगों के गुस्से का शिकार पार्टी को रेलवे किराया बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार माना जाए।
अब केंद्र में भाजपा की सरकार को इस पर फैसला लेना होगा। रेलवे बोर्ड के फैसले के अनुसार रेलवे किराये में सभी श्रेणी में दस फीसदी किराया बढ़ेगा। इस पर एफएसी के तहत 4.2 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगेगा। इस तरह लगभग 15 फीसदी किराया सभी श्रेणी में बढ़ जाएगा।