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रेल किराए में बढ़ोतरी कुछ घंटों में वापस क्यों हुई?

Sat, 17 May 2014 08:57 AM IST
Updated Sat, 17 May 2014 08:57 AM IST
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railway roll back his decision to increase fair

आम चुनाव खत्म होते ही रेलवे बोर्ड ने रेल किराये व माल भाड़े में वृद्धि की घोषणा को कुछ घंटों में वापस ले लिया। रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे के आदेश पर किराये व माल भाड़े में वृद्धि के फैसले पर अमल पर रोक दिया गया। रेलवे ने 20 मई से रेलवे के सभी श्रेणी के किरायों में 14.5 फीसदी तथा माल भाड़े में 6.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी।

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रेलवे की आय में गिरावट

railway roll back his decision to increase fair

सूत्रों का दावा है कि प्रस्तावित बजट की तुलना में रेलवे की आय में गिरावट तथा फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेंट (एफएसी) के तहत किराये व भाड़े में वृद्धि का यह फैसला काफी पहले हो चुका था किंतु चुनाव आचार संहिता के कारण अभी तक इसकी घोषणा नहीं की गई थी।

चुनाव परिणाम आते ही रेलवे बोर्ड ने किराया बढ़ाने संबंधी आदेश अपनी वेबसाइट पर डाल दिया। जैसे ही मीडिया में रेल किराया बढ़ने की खबर आई रेल मंत्री मल्लिकार्जुन ने रेलवे बोर्ड के अधिकारियों को इस आदेश पर अमल अगली सरकार के गठन तक रोकने का निर्देश दिया।

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गुस्से का शिकार न बने कांगेस?

railway roll back his decision to increase fair

सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस नहीं चाहती है कि महंगाई के लिए पहले से आम लोगों के गुस्से का शिकार पार्टी को रेलवे किराया बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार माना जाए।

अब केंद्र में भाजपा की सरकार को इस पर फैसला लेना होगा। रेलवे बोर्ड के फैसले के अनुसार रेलवे किराये में सभी श्रेणी में दस फीसदी किराया बढ़ेगा। इस पर एफएसी के तहत 4.2 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगेगा। इस तरह लगभग 15 फीसदी किराया सभी श्रेणी में बढ़ जाएगा।

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