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लोकलुभावन नहीं होगा इस बार रेल बजट

Tue, 01 Jan 2013 10:49 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 01 Jan 2013 10:49 PM IST
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rail budget will not populist

आने वाले समय में रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता विभाग की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना रहेगी। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि अगला रेल बजट लोकलुभावन नहीं होगा। किराया व माल भाड़ा तय करने के लिए प्रस्तावित अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो गई है।

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रेलवे की प्राथमिकताओं और उम्मीदों पर चर्चा करते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनय मित्तल ने नये साल में रेलवे की प्राथमिकताओं व उम्मीदों के कहा कि पिछले साल की तुलना में रेलवे ने इस वर्ष 19 फीसदी से भी ज्यादा आय अर्जित की है। इसमें सर्वाधिक 24 फीसदी की ग्रोथ मालभाड़े की मद में वृद्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि रेलवे की आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। हमें अपने खर्च पूरे करने के लिए ही आय में वृद्धि आवश्यक रूप से करनी होगी। नई परियोजनाओं के लिए बजट व अन्य मदद की जरूरत होगी।
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आय बढ़ाने के प्रयासों के तहत रेलवे की जमीनों व अन्य संपत्तियों को लीज पर देने का फैसला लिया गया है। रेलवे द्वारा किराया बढ़ाने के बारे में उन्होंने कहा कि यह फैसला उच्च स्तर पर लिया जाना है। उन्होंने बताया कि पिछले साल रेलवे ने अपने खर्चों को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय से 3000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जिसे इस साल उन्होंने लौटा दिया है।
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मगर बेहतर सेवा व सेफ्टी के लिए रेलवे में बहुत कुछ किया जाना है। उन्होंने 12वीं पंचवर्षीय योजना में रेलवे को 1.94 करोड़ फंड मिलने की संभावनाओं पर संतोष जताते हुए कहा कि वे रेलवे में नई परियोजनाओं को पीपीपी के आधार पर लाने के लिए सर्वाधिक जोर दे रहे हैं। इसके लिए प्रस्तावों को आकर्षक बनाने में निजी क्षेत्र से भी सुझाव लिए जा रहे हैं।

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