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रेल बजट: खजाना खाली, योजनाएं कई

Tue, 26 Feb 2013 11:16 PM IST
आर.के. सिंह (रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन)
आर.के. सिंह (रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन) Updated Tue, 26 Feb 2013 11:16 PM IST
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rail budget contrary to claims focus on security

बजट में रेलवे संरक्षा मद में पर्याप्त धनावंटन नही किया जाना चिंता का विषय है। रेलमंत्री चाहे जो दावे किए हों लेकिन रेलवे के रखरखाव के लिए दी गई धनराशि काफी कम है।

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दूसरी ओर पहले से ही व्यस्त लाइनों की क्षमता को बढ़ाने का उपाय किए बिना तमाम नई रेलगाड़ियों को चलाने की घोषणा भी रेल मंत्री के इस दावे को गलत साबित करती हैं कि वे सुरक्षित रेल यात्रा को लिए संजीदा हैं। किराया न बढ़ाना रेलमंत्री की राजनीतिक मजबूरी हो सकती है लेकिन भविष्य में इसे बढ़ाना ही होगा। वैसे अन्य साधनों से उन्होंने कुछ धनराशि उगाहने का जो प्रयास किया है वह ठीक है।
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बजट में मूल्य ह्रास आरक्षित निधि के लिए मात्र 7500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क के हिसाब से यह बहुत थोड़ा है। सभी को पता है कि प्रमुख रूटों पर क्षमता से अधिक ट्रेनें पहले से ही चल रही हैं।
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बजट में फिर सौ सवा सौ नई ट्रेनों के चलाने के साथ ही तमाम गाड़ियों के रूट में विस्तार किया गया है। यह गाड़ियां भी पहले से ही व्यवस्त मार्गों पर चलेंगी। सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक किए बिना यह एक खतरनाक कोशिश होगी।

बजट में रेलवे की माली हालत का भी ध्यान नहीं रखा गया है। पहली नजर में यह अच्छा लगता है कि रेलवे ने 63 हजार करोड़ से भी ज्यादा की योजना पेश की है लेकिन इसके लिए वह अपने स्रोत से केवल 14260 करोड़ रुपए ही जुटा पाएगी।

हम जानते हैं कि पिछले सालों में पीपीपी योजना के मामले में रेलवे का का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। बाजार से ऋण काफी ऊंचे ब्याज दरों पर लेना पड़ता है। बजट में नई योजनाएं लाने के स्थान पर पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर जोर देना चाहिए था। नई योजनाओं की घोषणा से बजट टुकड़ों में बंट जाएगा तथा योजनाओं पूरा करने में और देरी होगी।

रेल बजट में हम इस बात पर संतोष कर सकते हैं कि चालू वर्ष में रेलवे की माल ढुलाई टर्नओवर 1007 मिलियन टन रहा जो काफी अच्छा है लेकिन अगले साल के लिए जो 1047 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित हुआ है, वह बहुत कम है। शायद देश की जीडीपी में कमी के कारण ऐसा हुआ हो।


बजट में माल ढुलाई के लक्ष्य में नौ से दस फीसदी की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। मालभाड़े में पांच फीसदी डीजल सरचार्ज बढ़ाने से फ्रेट ट्रैफिक रेलवे से दूर जा सकता है। रेलवे ने इस वर्ष अपना आपरेटिंग रेशियो घटाकर 88.8 फीसदी कर लिया है। यह काफी अच्छा प्रयास है।

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