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लोकलुभावन नहीं, मनभावन होगा रेलबजट?

Mon, 25 Feb 2013 12:38 PM IST
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली Updated Mon, 25 Feb 2013 12:38 PM IST
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rail budget 2013: pleasing rail budget?

रेल मंत्री पवन कुमार बंसल मंगलवार को पेश होने वाले रेल बजट की तैयारी में लगे हुए है। आज अवकाश का दिन होने के बावजूद बंसल रेल बजट को अंतिम रूप दे रहे है। इस बार का यह रेल बजट कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ रेल उपभोक्ताओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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इसी साल छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे सूबों में विधानसभा चुनाव होने हैं उसके बाद मई 2014 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव की तैयारी होगी। डेढ़ दशक के बाद कांग्रेस के हाथों में आए रेल मंत्रालय को कैसे हांका जाता है इसकी प्रतीक्षा सभी को है।
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लालू प्रसाद और ममता बनर्जी की पार्टियों ने किराया, भाड़ा नहीं बढ़ने दिया। लालू प्रसाद के समय डीजल के दाम बढ़ते थे तो वे किराया घटाकर लालू-अर्थशास्त्र की संज्ञा देते थे। आजादी के बाद सबसे बेहतरीन ऑपरेर्टिग रेशो 74 फीसदी का लालू के समय ही रेल मंत्रालय ने दिया। ममता के समय रेलवे सिस्टम और उसके अर्थतंत्र में तो जैसे दीमक ही लग गया। लगातार घाटा दिखाते हुए बैलेंस-सीट खोखला हो गया।
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इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि पवन कुमार बसंल कैसे यात्री किराए के 24 हजार करोड़ रुपए के बड़े घाटे को पाटते हैं। चुनावी मुहाने पर खड़े होकर यात्री किराया और माल भाड़े में वे वृद्धि करने का जोखिम मोल लेते हैं या फिर उसे टाल देते हैं? वैसे इतना तो तय है कि इस बार का रेल बजट लोकलुभावन तो नहीं लेकिन सियासी मजबूरियों के चलते मनभावन जरूर होगा।



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